Edited By Rohini Oberoi,Updated: 26 May, 2026 04:22 PM

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जालसाजी और धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। यहां झांसीरोड थाना पुलिस ने शादी के नाम पर मोटी रकम ऐंठने और फर्जी शादियां कराने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है।
Gwalior Matrimonial Fraud : मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जालसाजी और धोखाधड़ी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है जिसे सुनकर खुद पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। यहां झांसीरोड थाना पुलिस ने शादी के नाम पर मोटी रकम ऐंठने और फर्जी शादियां कराने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है।
इस गिरोह के मास्टरमाइंड ने पैसों की खातिर अपनी ही दूसरी पत्नी को गरीब और अनाथ मुंहबोली बहन बताया और उसकी शादी एक सीधे-साधे युवक से करा दी। इस पूरी साजिश का मकसद शादी के कुछ दिन बाद पीड़ित परिवार को दहेज प्रताड़ना के झूठे केस में फंसाकर लाखों रुपये वसूलना था। पुलिस ने मुख्य आरोपी पति और उसकी मिलीभगत करने वाली पत्नी को हिरासत में ले लिया है।
लाखों खर्च कराकर रचाई धूमधाम से शादी
धोखाधड़ी का यह पूरा जाल जबलपुर के एक निजी अस्पताल में टीम लीडर के पद पर कार्यरत रतन शर्मा के साथ बुना गया। पीड़ित परिवार को 15 अप्रैल को सोनू तिवारी नाम के एक बिचौलिए ने रिश्ता सुझाया था। उन्हें झांसा दिया गया कि अजय उर्फ सोनू चौहान नाम का व्यक्ति अपनी एक बेहद गरीब, अनाथ मुंहबोली बहन राधा उर्फ दीक्षा मुद्गल की शादी कराना चाहता है।
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20 अप्रैल को लड़की दिखाने का नाटक हुआ और पीड़ित परिवार को रिश्ता पसंद आ गया। इसके बाद 27 अप्रैल को सगाई और फिर 7 मई को हिंदू रीति-रिवाज से दोनों की धूमधाम से शादी संपन्न हो गई। इस शादी और जेवर के नाम पर पीड़ित रतन शर्मा के करीब 6 लाख रुपये खर्च हो गए। इसके अलावा आरोपियों ने ब्यूटी पार्लर और अन्य मदों के नाम पर अलग से 50 हजार रुपये भी ऐंठे।
दुल्हन के वॉट्सऐप चैट ने खोला पति-पत्नी का राज
शादी के बाद जब दुल्हन दीक्षा अपने ससुराल पहुंची तो उसकी संदिग्ध हरकतों से परिवार को शक होने लगा। वह दिन-रात छिप-छिपकर मोबाइल पर किसी से लंबी बातें करती थी। एक दिन जब ससुराल वालों ने उसका मोबाइल चेक किया तो उसके वॉट्सऐप (WhatsApp) चैट देखकर उनके होश उड़ गए।
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चैट से यह बड़ा खुलासा हुआ कि जिसे अजय चौहान अपनी बहन बता रहा था वह असल में उसकी पत्नी थी। दोनों ने साल 2024 में आगरा के एक आर्य समाज मंदिर में प्रेम विवाह (Love Marriage) किया था और वे पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे थे। फिर पुलिस की शुरुआती जांच में जो कहानी सामने आई उसने सबको हैरान कर दिया। मुख्य आरोपी अजय चौहान की पहली शादी साल 2009 में हो चुकी है और पहली पत्नी से उसके बच्चे भी हैं। दीक्षा उसकी दूसरी पत्नी थी।
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अजय ने अपनी पहली पत्नी और बच्चों का खर्च उठाने, उन्हें खुश रखने और समाज में दिखावे के लिए अपनी इस दूसरी पत्नी दीक्षा का इस्तेमाल किया। उसने दीक्षा की शादी रतन शर्मा से सिर्फ इसलिए कराई ताकि कुछ दिन बाद वह पीड़ित परिवार पर घरेलू हिंसा और दहेज का झूठा केस दर्ज करा सके और फिर केस वापस लेने के बदले में मोटी रकम वसूल कर ब्लैकमेल कर सके।
वहीं झांसीरोड थाना प्रभारी शक्ति सिंह यादव के अनुसार मुख्य आरोपी अजय चौहान और उसकी सहयोगी पत्नी राधा उर्फ दीक्षा को गिरफ्तार कर लिया गया है और उनसे कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब इस गिरोह में शामिल बिचौलिए सोनू तिवारी सहित अन्य मददगारों की तलाश में जुटी है ताकि इस रैकेट के अन्य शिकारों का भी पता लगाया जा सके।