वैज्ञानिकों का बड़ा अलर्ट: भारतीय धरती में आई दरार, अब बदल सकता है एशिया का नक्शा!

Edited By Updated: 24 Jan, 2026 02:42 PM

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हिमालय को हम हमेशा मज़बूती, ऊंचाई और स्थिरता का प्रतीक मानते आए हैं, लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक चौंकाने वाली खोज ने इस सोच को हिला दिया है। हिमालय की ऊंची चोटियों के नीचे धरती के भीतर एक ऐसी प्रक्रिया चल रही है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।...

नेशनल डेस्क: हिमालय को हम हमेशा मज़बूती, ऊंचाई और स्थिरता का प्रतीक मानते आए हैं, लेकिन अब वैज्ञानिकों की एक चौंकाने वाली खोज ने इस सोच को हिला दिया है। हिमालय की ऊंची चोटियों के नीचे धरती के भीतर एक ऐसी प्रक्रिया चल रही है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं। ताज़ा शोध में सामने आया है कि तिब्बत के नीचे भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट सिर्फ टकरा नहीं रही, बल्कि अंदर ही अंदर दो हिस्सों में फट रही है। अब तक यह माना जाता था कि भारतीय प्लेट यूरेशियन प्लेट से टकराकर हिमालय को ऊपर उठा रही है। लेकिन नए सबूत बताते हैं कि कहानी इससे कहीं ज़्यादा जटिल है।

वैज्ञानिकों ने क्या नया देखा?
भूकंप से निकलने वाली तरंगें धरती के भीतर की संरचना का एक्स-रे जैसी जानकारी देती हैं। इन्हीं तरंगों का अध्ययन करते हुए वैज्ञानिकों को पता चला कि भारतीय प्लेट की निचली परत भारी और घनी होने के कारण टूटकर नीचे की ओर धंस रही है, जबकि उसकी ऊपरी परत अब भी उत्तर दिशा में खिसक रही है। यानी प्लेट झुक नहीं रही, बल्कि परत-दर-परत अलग हो रही है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में डीलैमिनेशन कहा जाता है, और हिमालय क्षेत्र में इसका इतना स्पष्ट प्रमाण पहली बार मिला है।

यह खोज इतनी खास क्यों है?
अब तक प्लेट टेक्टॉनिक्स के मॉडल यह मानते थे कि महाद्वीपीय प्लेटें या तो एक-दूसरे के नीचे जाती हैं या मुड़कर ऊपर उठती हैं। लेकिन भारतीय प्लेट का इस तरह अंदर से छिल जाना एक नई सोच को जन्म देता है।

इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि:

  • हिमालय दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ क्यों बने

  • तिब्बत का पठार इतना फैला और ऊंचा कैसे हुआ

  • और धरती के भीतर तनाव कैसे जमा होता है

धरती के भीतर झांकी कैसे मिली?

अमेरिका और चीन के वैज्ञानिकों की एक संयुक्त टीम ने दक्षिणी तिब्बत में 90 से ज़्यादा सीस्मिक स्टेशन लगाए। इन उपकरणों से मिले डेटा की मदद से वैज्ञानिकों ने धरती के अंदर की 3D संरचना तैयार की इस मॉडल में साफ दिखा कि जमीन की सतह से करीब 100 किलोमीटर नीचे भारतीय प्लेट टूटकर अलग हो रही है। यह प्रक्रिया लाखों-करोड़ों सालों से धीरे-धीरे चल रही है।

इसका असर क्या हो सकता है?
इस खोज के कई दूरगामी नतीजे हो सकते हैं। वैज्ञानिकों को अब यह समझने में मदद मिलेगी कि इस इलाके में भूकंप बार-बार क्यों आते हैं। इसके अलावा हिमालय और तिब्बत में पाए जाने वाले गर्म पानी के झरनों में मिलने वाली हीलियम-3 गैस को भी इसी प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है। प्लेट के टूटने से धरती के अंदर की गर्मी और गैसों को बाहर आने का रास्ता मिल सकता है।

वैज्ञानिकों की चेतावनी
हालांकि यह खोज बेहद अहम है, लेकिन वैज्ञानिक जल्दबाज़ी में निष्कर्ष निकालने के मूड में नहीं हैं। मोनाश यूनिवर्सिटी के भूवैज्ञानिक फैबियो कैपिटानियो का कहना है कि यह धरती के भीतर चल रही बेहद लंबी प्रक्रिया का सिर्फ एक छोटा सा दृश्य है। उनके मुताबिक, “हमने अभी सिर्फ एक झलक देखी है, पूरी कहानी समझने के लिए और गहरे अध्ययन की ज़रूरत है।”

आगे क्या होगा?
अब वैज्ञानिक सैटेलाइट डेटा और कंप्यूटर सिमुलेशन की मदद से इस प्रक्रिया को और विस्तार से समझने की तैयारी कर रहे हैं। 3D मॉडलिंग से यह पता लगाया जाएगा कि प्लेट के टूटने से भविष्य में भूकंप का खतरा कितना बढ़ सकता है। एक बात तय है—हिमालय सिर्फ बाहर से ही नहीं, अंदर से भी दुनिया के सबसे रहस्यमय पहाड़ों में से एक है।

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