India Budget 1947: केवल इतना था आजाद भारत का पहला बजट, जानकर उड़ जाएंगे होश

Edited By Updated: 11 Jan, 2026 05:58 PM

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स्वतंत्र भारत का पहला बजट 26 नवंबर 1947 को संसद में पेश किया गया था। इसे तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने पेश किया। यह बजट केवल साढ़े सात महीनों के लिए था और देश विभाजन व सुरक्षा चुनौतियों के बीच तैयार किया गया। कुल राजस्व 171.15...

नेशनल डेस्क : देश का आम बजट हर साल 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है और आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक सभी की निगाहें वित्त मंत्री पर टिकी रहती हैं। लेकिन जब हम आज ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की बात करते हैं, तो यह जानकर हैरानी होती है कि आज़ाद भारत का पहला बजट कितना छोटा और चुनौतीपूर्ण था। 15 अगस्त 1947 को आज़ादी के बाद महज तीन महीने में, 26 नवंबर 1947 को पहला यूनियन बजट संसद में पेश किया गया। यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी तत्कालीन वित्त मंत्री सर आर.के. शनमुखम चेट्टी ने निभाई।

बंटवारे के बीच पेश हुआ पहला बजट

उस समय देश विभाजन और सांप्रदायिक दंगों के बीच आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था। बजट केवल साढ़े सात महीनों (15 अगस्त 1947 से 31 मार्च 1948) के लिए तैयार किया गया। बजट पेश करते समय सरकार की प्राथमिकता देश की सुरक्षा और विस्थापितों की बसाहट थी। दिलचस्प यह था कि पाकिस्तान का अलग होने के बावजूद, सितंबर 1948 तक भारत और पाकिस्तान ने समान मुद्रा साझा करने का निर्णय लिया। बाद में सर चेट्टी के इस्तीफे के बाद जॉन मथाई ने वित्त मंत्री का पद संभाला और 1949-50 का बजट पेश किया, जो संयुक्त भारत के लिए पहला पूर्ण बजट माना गया।

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पहला बजट: राजस्व, खर्च और घाटा

पहले बजट के आंकड़े आज के समय में बेहद छोटे लगते हैं। उस समय कुल राजस्व अनुमान 171.15 करोड़ रुपये था, जबकि कुल खर्च लगभग 197.29 करोड़ रुपये तय किया गया। यानी पहला बजट घाटे का बजट था, जिसमें राजकोषीय घाटा करीब 24.59 करोड़ रुपये था। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के कारण रक्षा पर सबसे अधिक खर्च हुआ। कुल खर्च में लगभग 46-50 प्रतिशत यानी 92.74 करोड़ रुपये रक्षा पर आवंटित किए गए।

ऐतिहासिक महत्व और सबक

यह बजट न केवल वित्तीय दृष्टि से महत्वपूर्ण था, बल्कि उस समय देश की राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों को भी दर्शाता है। विभाजन के दर्द, आर्थिक कठिनाइयों और नए बने स्वतंत्र भारत की जिम्मेदारियों के बीच यह पहला बजट देश की दिशा तय करने वाला कदम साबित हुआ। आज जब हम करोड़ों-खरबों के बजट की चर्चा करते हैं, तब यह ऐतिहासिक बजट याद दिलाता है कि स्वतंत्र भारत की अर्थव्यवस्था की नींव कितनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में रखी गई थी।

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