Edited By Mansa Devi,Updated: 27 Feb, 2026 01:57 PM

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्योग जगत से निवेश एवं नवाचार के साथ आगे आने और वित्तीय संस्थानों से उन्हें व्यावहारिक समाधान प्रदान करने एवं बाजार विश्वास को मजबूत करने में सहयोग देने का शुक्रवार को आग्रह किया। '
नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्योग जगत से निवेश एवं नवाचार के साथ आगे आने और वित्तीय संस्थानों से उन्हें व्यावहारिक समाधान प्रदान करने एवं बाजार विश्वास को मजबूत करने में सहयोग देने का शुक्रवार को आग्रह किया। 'विकसित भारत के लिए प्रौद्योगिकी, सुधार एवं वित्त' विषय पर बजट के बाद आयोजित 'वेबिनार' को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि जब सरकार, उद्योग एवं ज्ञान क्षेत्र से जुड़े लोग एक साथ आते हैं, तो '' सुधार परिणामों में परिवर्तित होते हैं और कागज पर की गई घोषणाएं जमीनी स्तर पर उपलब्धियों में तब्दील होती हैं।''
उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले एक दशक में अवसंरचना पर जोर दिया है। सार्वजनिक पूंजीगत व्यय 11 वर्ष पहले दो लाख करोड़ रुपये था जो बढ़कर केंद्रीय बजट 2026-27 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह उच्च पूंजीगत व्यय आवंटन निजी क्षेत्र के लिए नए उत्साह के साथ आगे आने का संकेत है। उन्होंने उद्योग से 2026-27 के बजट की सभी घोषणाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
मोदी ने कहा, '' भारतीय कंपनियों को नए निवेश एवं नवाचार के साथ आगे आना चाहिए। वित्तीय संस्थानों को व्यावहारिक समाधान तैयार करने और बाजार विश्वास बढ़ाने में सहयोग देना चाहिए।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में भारत ने असाधारण मजबूती प्रदर्शित की है। यह संयोग से नहीं बल्कि दृढ़ विश्वास-आधारित सुधारों के कारण संभव हुआ है।
सरकार ने प्रक्रियाओं को भी सरल बनाया है और कारोबार सुगमता को काफी आसान किया है। उन्होंने सुझाव दिया, '' हमें एक स्पष्ट 'रिफॉर्म पार्टनरशिप चार्टर' विकसित करना चाहिए जिसमें सरकार, उद्योग, वित्तीय संस्थानों और शिक्षाविदों के बीच सहयोग हो। यह चार्टर 2047 तक 'विकसित भारत' बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होगा।''
बजट का मूल्यांकन अक्सर विभिन्न मानकों पर किए जाने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा, '' राष्ट्रीय बजट कोई अल्पकालिक व्यापारिक दस्तावेज नहीं है। यह एक नीतिगत खाका है। इसलिए बजट की प्रभावशीलता का आकलन भी ठोस एवं सार्थक मानकों पर किया जाना चाहिए। ''