नार्वे में भारत ने मानवाधिकार आरोपों पर फिर खोला मोर्चा, विदेशी पत्रकार के सवाल का दिया करारा जवाब

Edited By Updated: 19 May, 2026 07:00 PM

india rejects allegations of human rights cites constitutional values

भारत ने नॉर्वे में मानवाधिकार हनन के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए अपने संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं का बचाव किया। विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, न्याय और समानता के सिद्धांतों पर आधारित...

International Desk: नार्वे में  भारत ने 3 दिन में दूसरी बार मानवाधिकार हनन के आरोपों को सख्ती से खारिज करते हुए अपने संवैधानिक मूल्यों और लोकतांत्रिक परंपराओं का बचाव किया है। यह बयान सिबी जॉर्ज  (Sibi George) ने  Oslo में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया। विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर  के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता की जानकारी मीडिया को दे रहे थे। इसी दौरान नॉर्वे की पत्रकार हेली लेंग स्वेन्डसेन (Heli Leng Svendsen) ने भारत में कथित मानवाधिकार हनन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाया।

 

इससे पहले पत्रकार ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की थी, लेकिन कार्यक्रम से पहले ही स्पष्ट कर दिया गया था कि दोनों नेता सवालों के जवाब नहीं देंगे। बाद में नॉर्वे में भारतीय दूतावास ने पत्रकार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर सवाल पूछने का निमंत्रण दिया। सवाल का जवाब देते हुए सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत का संविधान न्याय, स्वतंत्रता, समानता और अभिव्यक्ति की आजादी की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि भारत एक “संप्रभु, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य” है, जहां विचार, विश्वास, आस्था और उपासना की स्वतंत्रता मौलिक अधिकारों का हिस्सा है।

 

उन्होंने कहा कि भारत पर दुनिया इसलिए भरोसा करती है क्योंकि उसने वैश्विक चुनौतियों में लगातार सकारात्मक भूमिका निभाई है। उन्होंने G20 Summit, Voice of Global South Summit और हालिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी का उदाहरण दिया। सिबी जॉर्ज ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत द्वारा 100 से अधिक देशों को वैक्सीन भेजने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत केवल अपने लिए नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए काम करता है। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “लोग भारत के विशाल आकार और जटिलता को समझे बिना कुछ गैर-सरकारी संगठनों की रिपोर्ट पढ़कर सवाल पूछने लगते हैं।”

 

उन्होंने कहा कि भारत सदियों से लोकतांत्रिक समाज रहा है और देश को अपने लोकतंत्र पर गर्व है। यह लगातार दूसरा मौका है जब यूरोप दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मानवाधिकारों को लेकर सवालों का सामना करना पड़ा। इससे पहले Netherlands के हेग में भी दो पत्रकारों ने इसी तरह के प्रश्न उठाए थे। विश्लेषकों के अनुसार भारत अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मानवाधिकारों और लोकतंत्र को लेकर होने वाली आलोचनाओं का जवाब अधिक आक्रामक और आत्मविश्वास के साथ दे रहा है, खासकर तब जब वह खुद को “ग्लोबल साउथ” की प्रमुख आवाज के रूप में पेश कर रहा है।
 

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