‘ऑपरेशन सिंदूर’ में चमका राफेल… IAF बोली– अब बढ़ेगा फाइटर फ्लीट का दम

Edited By Updated: 11 Feb, 2026 10:39 PM

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भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू बेड़े को और मजबूत करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। IAF के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने राफेल को “ऑपरेशन सिंदूर का हीरो” बताते हुए संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में फाइटर जेट्स की बड़ी खरीद हो सकती है।

नेशनल डेस्क : भारतीय वायुसेना अपने लड़ाकू बेड़े को और मजबूत करने की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ा रही है। IAF के वाइस चीफ एयर मार्शल नागेश कपूर ने राफेल को “ऑपरेशन सिंदूर का हीरो” बताते हुए संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में फाइटर जेट्स की बड़ी खरीद हो सकती है।

एक बातचीत में एयर मार्शल कपूर ने कहा कि राफेल ने हालिया ऑपरेशनों में अहम भूमिका निभाई और वह कई “हीरो” में से एक था। उन्होंने साफ किया कि वायुसेना अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त मल्टी-रोल फाइटर विमान शामिल करने की दिशा में काम कर रही है।

114 मल्टी-रोल फाइटर जेट्स की तैयारी

सरकार 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदने के प्रस्ताव पर आगे बढ़ रही है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्री की अध्यक्षता वाली डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) जल्द ही इस प्रोजेक्ट के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) पर फैसला ले सकती है। इससे पहले डिफेंस प्रोक्योरमेंट बोर्ड इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे चुका है। अगर अंतिम मंजूरी मिलती है, तो अनुमानित 3.25 लाख करोड़ रुपये की यह डील भारत के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाकू विमान खरीद में शामिल हो सकती है।

क्यों जरूरी है यह खरीद?

वायुसेना फिलहाल करीब 29 फाइटर स्क्वाड्रन के साथ काम कर रही है, जबकि स्वीकृत संख्या 42 है। पश्चिमी और उत्तरी सीमाओं पर बढ़ती चुनौतियों के बीच इस कमी को जल्द पूरा करना रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।

‘मेक इन इंडिया’ को भी मिलेगा बढ़ावा

सूत्रों के अनुसार प्रस्तावित योजना के तहत 114 विमानों में से 18 सीधे तैयार हालत (फ्लाई-अवे कंडीशन) में मिल सकते हैं, जबकि शेष भारत में बनाए जाएंगे। करीब 80 प्रतिशत उत्पादन देश में ही होने की संभावना है, जिसमें स्वदेशी हिस्सेदारी 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

संभावित कॉन्फिगरेशन में 88 सिंगल-सीट और 26 ट्विन-सीट वेरिएंट शामिल हो सकते हैं। फ्रांसीसी कंपनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय निजी कंपनियों के साथ साझेदारी कर स्थानीय उत्पादन और असेंबली की व्यवस्था कर सकती है, जिससे देश की एयरोस्पेस निर्माण क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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