OPERATION SINDOOR 2.0 : पाकिस्तान का मिटेगा नामो-निशान, भारतीय सेना ने दी अंतिम चेतावनी

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 01:25 PM

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भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है। वेस्टर्न कमांड और 2 कोर के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान अगर शत्रुता जारी रखता है, तो उसे निर्णायक जवाब मिलेगा। ऑपरेशन में स्वदेशी ड्रोन्स, ‘भैरव बटालियन’ और ‘अश्वनी...

नेशनल डेस्कः भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ के तहत पाकिस्तान को अंतिम चेतावनी देते हुए साफ कर दिया है कि अगर पड़ोसी देश ने किसी भी प्रकार की शत्रुता जारी रखी, तो उसे गंभीर नुकसान झेलना पड़ेगा। वेस्टर्न कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार और 2 कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल राजेश पुष्कर ने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान अपनी रणनीतिक महत्वाकांक्षा बनाए रखने के लिए बार-बार भारत विरोधी साजिशों में लिप्त हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने कारगिल युद्ध या मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर के सबक से कोई सुधार नहीं किया है। इस बार भारतीय सेना पूरी तरह तैयार है और उसके पास अत्याधुनिक तकनीक और घातक ताकत मौजूद है, जो पड़ोसी देश को अनुशासन सिखाने के लिए निर्णायक साबित होगी।

अत्याधुनिक तकनीक और स्वदेशी ताकत पर जोर

‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ की रणनीति पिछली बार से कहीं अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाई गई है। सेना ने ‘भैरव बटालियन’ को पैरा ऑपरेशंस के लिए तैयार किया है और ड्रोन आधारित मिशनों के लिए ‘अश्वनी प्लाटून’ को सक्रिय किया गया है। इसके अलावा, स्वदेशी ड्रोन्स का उत्पादन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है ताकि दुश्मन के ठिकानों, लॉन्च पैड्स और बेसों पर सटीक निशाना साधा जा सके। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद नियंत्रण में आने के बाद भी, सेना ने पाकिस्तान से संभावित घुसपैठ और प्रशिक्षण गतिविधियों का जवाब देने के लिए हवा, जमीन और समुद्र तीनों मोर्चों पर तैयारी पूरी कर ली है। पिछले ऑपरेशन में पाकिस्तान की गुहार पर सीजफायर हुआ था, लेकिन इस बार प्रतिक्रिया पूरी तरह दुश्मन के कदमों पर निर्भर करेगी।

ऑपरेशन सिंदूर 2.0 की ताकत

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऑपरेशन सिंदूर 2.0 पूरी ताकत के साथ लागू होता है, तो पाकिस्तान की सैन्य क्षमता और आर्थिक स्थिति दोनों प्रभावित होंगी। हवाई ठिकाने, रडार स्टेशन और नौसैनिक बंदरगाहों के अलावा आईएसआई के आतंकवादी नेटवर्क को निशाना बनाया जाएगा। इस वजह से पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है और विदेशी निवेश भी रुकेगा। सेना ने यह स्पष्ट किया कि नागरिक क्षेत्रों को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन आतंकवाद के ठिकानों को पूरी तरह समाप्त करने से पीछे नहीं हटेगी। अब पाकिस्तान के पास या तो आतंकवाद को छोड़ना होगा या भारी कीमत चुकानी होगी।

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