NCERT Controversy पर SC ने अपनाया कड़ा रुख, कहा- यह न्यायपालिका को बदनाम करने की सोची-समझी साजिश है

Edited By Updated: 26 Feb, 2026 12:37 PM

sc ncert material is a deliberate conspiracy to defame the judiciary

NCERT की क्लास 8th की सोशल की किताब में 'Corruption in the Judiciary' वाले पाठ पर SC ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान  इस मामले को संस्थान की गरिमा  को चोट पहुँचाने वाला कदम बताया है। CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि जब तक वे इस...

NCERT Controversy: NCERT की क्लास 8th की सोशल की किताब में 'Corruption in the Judiciary' वाले पाठ पर SC ने कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान  इस मामले को संस्थान की गरिमा  को चोट पहुँचाने वाला कदम बताया है। CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि जब तक वे इस मामले में पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो जाते, सुनवाई जारी रहेगी।

यह एक सोची- समझी साजिश है
चीफ जस्टिस ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह केवल कक्षा 8 के बच्चों का विषय नहीं है, बल्कि न्यायपालिका को नीचा दिखाने का एक कैलकुलेटिव मूव यानि की  एक सोचा-समझा कदम है। कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा,"उन्होंने गोली चलाई और आज ज्यूडिशियरी खून बहा रही है।" अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि यदि छात्रों और शिक्षकों को यह सिखाया जाएगा कि न्यायपालिका भ्रष्ट है, तो समाज में क्या संदेश जाएगा।

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लापरवाही और सामग्री पर विवाद
अदालत ने विवादित अध्याय के अंशों पर गौर करते हुए कहा कि इसमें न्यायपालिका के खिलाफ शिकायतों का इस तरह जिक्र किया गया है जैसे कोई कार्रवाई ही न हुई हो। साथ ही, एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश के भाषण के शब्दों को संदर्भ से बाहर निकालकर संस्थान में पारदर्शिता की कमी और भ्रष्टाचार को स्वीकारने जैसा दिखाया गया है। कोर्ट ने कहा कि यह पूरी सामग्री अत्यंत लापरवाही से लिखी गई है और इसे लिखने वालों ने अपनी राय देने के बजाय संस्थान पर हमला किया है।

सरकार और NCERT का पक्ष
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को निम्नलिखित जानकारियां दीं। उन्होंने कहा कि बाजार में गई 32 प्रतियों को वापस ले लिया गया है और आगे के प्रकाशन पर रोक लगा दी गई है। इस अध्याय को तैयार करने वाले दो विशेषज्ञों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। वे भविष्य में किसी भी मंत्रालय के साथ काम नहीं कर पाएंगे। वहीं NCERT ने इस पूरे प्रकरण के लिए कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने की बात कही है।

चीफ जस्टिस ने यह भी साझा किया कि उन्हें स्वयं इस किताब की एक प्रति मिली है और यह सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से मौजूद है। उन्होंने नाराजगी जताई कि कंटेंट का बचाव करने की कोशिश की गई, जबकि यह सीधे तौर पर संस्थान पर प्रहार था।

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