Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 25 Mar, 2026 11:33 PM

बदलते युद्ध के स्वरूप और आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है।
नेशनल डेस्क: बदलते युद्ध के स्वरूप और आधुनिक तकनीक के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब आर्मर्ड (टैंक) रेजिमेंट्स को भी विशेष ड्रोन यूनिट्स से लैस किया जा रहा है, जिन्हें ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ नाम दिया गया है। यह कदम सेना की युद्ध क्षमता को कई गुना बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
आधुनिक युद्ध से मिला सबक, ड्रोन बने ‘गेम चेंजर’
हाल के वैश्विक संघर्षों जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा संघर्ष और ईरान-इजराइल तनाव ने यह साफ कर दिया है कि अब युद्ध सिर्फ टैंक और तोपों से नहीं जीते जाते। ड्रोन तकनीक ने लड़ाई के मैदान में पूरी रणनीति बदल दी है। इसी अनुभव के आधार पर सेना ने टैंक यूनिट्स को भी ड्रोन सपोर्ट देने का फैसला किया है।
क्या है ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ और कैसे करेगा काम?
‘शौर्य स्क्वाड्रन’ एक कंपनी स्तर की विशेष यूनिट है, जो सीधे फ्रंटलाइन में टैंक रेजिमेंट्स के साथ काम करेगी। इसमें अत्याधुनिक तकनीक से लैस प्रशिक्षित जवान शामिल होंगे। इन यूनिट्स के पास कई तरह के एडवांस ड्रोन होंगे, जैसे निगरानी ड्रोन, अटैक ड्रोन, FPV ड्रोन, स्वार्म ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन। इनका काम सिर्फ हमला करना नहीं, बल्कि दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना, टारगेट की पहचान करना, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में मदद करना और जरूरत पड़ने पर सप्लाई व मेडिकल सहायता देना भी होगा।
‘अमोघ ज्वाला’ अभ्यास में दिखी ताकत
हाल ही में अमोघ ज्वाला युद्धाभ्यास के दौरान उत्तर प्रदेश के बबीना फायरिंग रेंज में इस नई रणनीति का प्रदर्शन किया गया। इस अभ्यास में टैंक, हेलीकॉप्टर, फाइटर जेट और ड्रोन को एक साथ ऑपरेट कर मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की क्षमता को परखा गया, जो भविष्य के युद्ध की झलक मानी जा रही है।
टैंक और ड्रोन यानी और ज्यादा घातक ताकत
सेना के पास फिलहाल 5000 से अधिक टैंक हैं, जिनमें T-90 भीष्म, T-72 अजेय और अर्जुन Mk1A जैसे आधुनिक टैंक शामिल हैं। ड्रोन यूनिट्स के जुड़ने से इन टैंकों की मारक क्षमता और सटीकता दोनों में बड़ा इजाफा होगा। इससे सैनिकों को एम्बुश (घात लगाकर हमले) का खतरा भी कम होगा।
भविष्य की जंग के लिए तैयार भारत
सेना अब हर आर्मर्ड रेजिमेंट में ‘शौर्य स्क्वाड्रन’ तैनात करने की दिशा में काम कर रही है। यह पहल दिखाती है कि भारत अब पारंपरिक युद्ध से आगे बढ़कर मल्टी-डोमेन वॉरफेयर की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।