Edited By Tanuja,Updated: 08 Jun, 2026 02:12 PM

बहरीन में रहने वाले भारतीय कारोबारी कृष्णकुमार श्यामला रविंद्रन की किस्मत एक मुफ्त लॉटरी टिकट से चमक गई। अबू धाबी बिग टिकट ड्रॉ में उन्हें 2 करोड़ दिरहम (करीब 52 करोड़ रुपये) का जैकपॉट मिला। सात साल तक लगातार टिकट खरीदने के बाद आखिरकार उन्हें बड़ी...
International Desk:बहरीन में रहने वाले भारतीय कारोबारी कृष्णकुमार श्यामला रविंद्रन की किस्मत एक मुफ्त लॉटरी टिकट से चमक गई। अबू धाबी बिग टिकट ड्रॉ में उन्हें 2 करोड़ दिरहम (करीब 52 करोड़ रुपये) का जैकपॉट मिला। सात साल तक लगातार टिकट खरीदने के बाद आखिरकार उन्हें बड़ी सफलता मिली।
कहते हैं कि किस्मत कब बदल जाए, इसका अंदाजा कोई नहीं लगा सकता। बहरीन में रहने वाले एक भारतीय कारोबारी के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। वर्षों से लॉटरी खरीद रहे इस शख्स की जिंदगी उस टिकट ने बदल दी, जिसके लिए उसने एक भी पैसा नहीं चुकाया था। एक मुफ्त टिकट पर उसे करीब 52 करोड़ रुपये का जैकपॉट लग गया। कृष्णकुमार श्यामला रविंद्रन (Krishnakumar Shyamala Ravindran) पिछले 23 वर्षों से बहरीन में रह रहे हैं और वहां रेस्तरां का व्यवसाय चलाते हैं। 43 वर्षीय कृष्णकुमार हाल ही में अपने परिवार के साथ छुट्टियां मनाने के लिए केरल आए हुए थे।
इसी दौरान 4 जून को निकले Abu Dhabi Big Ticket Draw के परिणाम ने उनकी जिंदगी बदल दी। उन्होंने 2 करोड़ दिरहम यानी लगभग 52 करोड़ रुपये का जैकपॉट जीत लिया। कृष्णकुमार ने 28 मई को ऑनलाइन टिकट खरीदे थे। उस समय 'बाय 2, गेट 2 फ्री' ऑफर चल रहा था। उन्होंने दो टिकट खरीदे और दो टिकट मुफ्त में मिले। दिलचस्प बात यह रही कि उनकी पत्नी और बहन ने टिकट नंबर रैंडम तरीके से चुने थे। बाद में इन्हीं मुफ्त टिकटों में से एक टिकट नंबर 339729 पर जैकपॉट निकल आया। जब आयोजकों ने जीत की सूचना देने के लिए कृष्णकुमार को फोन किया, तब उनका बहरीन वाला मोबाइल नंबर बंद था क्योंकि वह भारत में थे और नंबर रोमिंग पर नहीं था। बाद में व्हाट्सऐप के जरिए उनके भारतीय नंबर पर संपर्क किया गया। तभी उन्हें पता चला कि वह करोड़पति बन चुके हैं।
कृष्णकुमार ने बताया कि पता चलते ही उनके मुंह से निकला कि सोचा न था ऐसे भी चमक सकती है किस्मत। कृष्णकुमार की कहानी सिर्फ किस्मत नहीं बल्कि धैर्य और निरंतर प्रयास की भी कहानी है। होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद वह करीब 20 साल की उम्र में बहरीन पहुंचे थे।शुरुआत में नौकरी करने के बाद उन्होंने अपना रेस्तरां शुरू किया। कारोबार के कठिन दौर में बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ उन्होंने बिग टिकट की लॉटरी खरीदना शुरू किया। पिछले सात वर्षों से वह लगातार हर महीने टिकट खरीद रहे थे। कोरोना महामारी के बाद उनका व्यवसाय सुधर गया, लेकिन उन्होंने टिकट खरीदना नहीं छोड़ा। कृष्णकुमार ने बताया कि इस बार उन्होंने टिकट किसी दोस्त या समूह के साथ साझा नहीं किया था। इसलिए पूरी इनामी राशि केवल उन्हें ही मिलेगी।
उन्होंने कहा कि अभी तक उन्हें इस जीत पर पूरी तरह यकीन नहीं हो रहा है। परिवार के सभी सदस्य बेहद खुश हैं, खासकर उनकी पत्नी और बहन, जिन्होंने टिकट नंबर चुने थे। 52 करोड़ रुपये जीतने के बावजूद कृष्णकुमार की पहली प्राथमिकता खुद नहीं, बल्कि उनका एक करीबी दोस्त है। उनके दोस्त और बिजनेस पार्टनर पिछले तीन महीने से कोमा में हैं। सीढ़ियों से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी। कृष्णकुमार का कहना है कि वह सबसे पहले अपने दोस्त को बेहतर इलाज के लिए भारत लाने की व्यवस्था करेंगे। इनामी राशि के उपयोग को लेकर उन्होंने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं किया है। वह परिवार के साथ चर्चा करके भविष्य की योजना बनाएंगे।