Edited By Ramanjot,Updated: 02 Feb, 2026 09:02 PM

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 फरवरी 2026) को धर्मांतरण रोधी कानूनों को लेकर एक अहम सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और देश के 12 राज्यों को नोटिस जारी किया है।
नेशनल डेस्क: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 फरवरी 2026) को धर्मांतरण रोधी कानूनों को लेकर एक अहम सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और देश के 12 राज्यों को नोटिस जारी किया है। यह मामला नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) की ओर से दायर नई जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें कई राज्यों के Anti-Conversion Laws को संविधान के खिलाफ बताया गया है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए सभी पक्षों को चार सप्ताह के भीतर जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस संवेदनशील मुद्दे की आगे की सुनवाई अब तीन जजों की संविधान पीठ द्वारा की जाएगी।
याचिका में क्या है आपत्ति?
NCCI की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि कई राज्यों में लागू धर्मांतरण कानूनों का व्यापक दुरुपयोग किया जा रहा है। उनका तर्क था कि इन कानूनों के चलते आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों—अनुच्छेद 14 (समानता), 21 (जीवन व स्वतंत्रता) और 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का गंभीर उल्लंघन हो रहा है।
उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों के कानून ऐसे हैं, जो समूहों को शिकायत दर्ज कराने के लिए प्रेरित करते हैं, जिससे बिना ठोस आधार के FIR, पुलिस कार्रवाई और उत्पीड़न बढ़ रहा है। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं ने इन कानूनों पर तत्काल अंतरिम रोक लगाने की मांग की।
केंद्र सरकार की दलील
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार अपना जवाब जल्द दाखिल करेगी। उन्होंने दलील दी कि ये कानून पहले से मौजूद सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच के पुराने फैसलों के दायरे में आते हैं।
इस पर मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत का ध्यान ओडिशा और राजस्थान में हालिया संशोधनों की ओर दिलाया और कहा कि ये नए बदलाव पहले की याचिकाओं में शामिल नहीं थे। उन्होंने सभी राज्यों के स्थायी अधिवक्ताओं को औपचारिक नोटिस देने की मांग भी की।
किन राज्यों को भेजा गया नोटिस?
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अलावा जिन 12 राज्यों को नोटिस जारी किया है, वे हैं— राजस्थान, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, झारखंड, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश। अदालत ने निर्देश दिया है कि नोटिस की प्रति संबंधित राज्यों के महाधिवक्ताओं (Advocate General) को भी भेजी जाए। साथ ही सभी राज्य चाहें तो संयुक्त जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले से ही इन कानूनों की संवैधानिक वैधता से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। सितंबर 2025 में भी अदालत ने कुछ मामलों में राज्यों से जवाब तलब किया था।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत अंतरिम राहत देती है या नहीं। यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता, व्यक्तिगत अधिकारों और राज्य की कानून व्यवस्था के बीच संतुलन की बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।