बांग्लादेश में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार की अखबार कार्यलय में संदिग्ध मौत, न्यूजरूम में फंदे से लटका मिला शव

Edited By Updated: 12 Sep, 2026 08:07 PM

senior hindu journalist found dead inside bangladesh newsroom

बांग्लादेश के बरिशाल में 57 वर्षीय हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी का शव ‘समकाल’ के कार्यालय में मिला। पुलिस ने मौत का कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होने की बात कही है। अवामी लीग ने शरीर की स्थिति को लेकर सवाल उठाते हुए घटना में साजिश की आशंका जताई...

Dhaka: बांग्लादेश के बरिशाल जिले में वरिष्ठ हिंदू पत्रकार पुलक चटर्जी की मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 57 वर्षीय चटर्जी का शव शुक्रवार शाम बांग्लादेशी अखबार ‘समकाल’ के बरिशाल ब्यूरो कार्यालय के अंदर फंदे से लटका मिला। पुलिस ने कहा है कि मौत की सही वजह शव परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगी। वहीं अवामी लीग ने घटना की परिस्थितियों पर सवाल उठाते हुए इसमें साजिश की आशंका जताई है। पुलक चटर्जी ‘डेली समकाल’ के बरिशाल ब्यूरो के पूर्व प्रमुख रह चुके थे। स्थानीय मीडिया के मुताबिक, शुक्रवार शाम उनका शव अखबार के कार्यालय के अंदर मिला। बरिशाल कोतवाली मॉडल पुलिस थाने के प्रभारी अधिकारी अल मामून-उल इस्लाम ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि मौत का वास्तविक कारण शव परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा।
 

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, चटर्जी को करीब तीन साल पहले ‘समकाल’ से सेवा से हटा दिया गया था। इससे पहले वह बांग्लादेशी अखबार ‘जुगांतर’ में भी लंबे समय तक काम कर चुके थे। वह बरिशाल प्रेस क्लब के महासचिव भी रह चुके थे। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटी है। बांग्लादेश की अवामी लीग ने शनिवार को चटर्जी की मौत की परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए। पार्टी ने कहा कि सामने आई तस्वीर में उनके शरीर की स्थिति को लेकर संदेह पैदा होता है। अवामी लीग ने दावा किया कि तस्वीर में उनके दोनों पैर जमीन पर दिखाई दे रहे हैं, घुटने मुड़े हुए हैं और शरीर लगभग सीधा है। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या ऐसी स्थिति में मौत सामान्य तरीके से हुई या घटना को किसी दूसरे रूप में पेश करने की कोशिश की गई।

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अवामी लीग ने सवाल किया कि यदि घटना को किसी तरह से मंचित किया गया था तो ऐसा किसने और क्यों किया। पार्टी ने चटर्जी को अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े पत्रकार के तौर पर रेखांकित करते हुए उनकी मौत की पूरी जांच की मांग की है। अवामी लीग ने अपने बयान में 2001 से 2006 के बीच बांग्लादेश में BNP-जमात-ए-इस्लामी गठबंधन की सरकार का जिक्र किया। पार्टी ने आरोप लगाया कि उस दौर में अल्पसंख्यक समुदायों पर हमले, मंदिरों को निशाना बनाए जाने, घरों में आगजनी, जमीन कब्जाने और महिलाओं के खिलाफ हिंसा जैसी घटनाएं हुई थीं। अवामी लीग ने दावा किया कि 2026 में भी ऐसी ही परिस्थितियां दोबारा दिखाई दे रही हैं।
  

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