Edited By Ramanjot,Updated: 28 Jan, 2026 06:19 PM

झारखंड में JMM–कांग्रेस गठबंधन की सरकार भले ही स्थिर दिख रही हो, लेकिन कांग्रेस संगठन के भीतर गंभीर असंतोष सामने आया है।
नेशनल डेस्क: झारखंड में JMM–कांग्रेस गठबंधन की सरकार भले ही स्थिर दिख रही हो, लेकिन कांग्रेस संगठन के भीतर गंभीर असंतोष सामने आया है। पार्टी कोटे से बने मंत्रियों की कार्यशैली को लेकर कांग्रेस के कई विधायक खुलकर नाराज हैं। हालात इतने बिगड़ गए कि पांच कांग्रेस विधायक दिल्ली पहुंच गए और सीधे पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी शिकायतें रखीं। विधायकों का आरोप है कि मंत्रियों की अनदेखी से न सिर्फ उनके क्षेत्र का काम प्रभावित हो रहा है, बल्कि इससे पार्टी की जमीनी पकड़ भी कमजोर पड़ रही है।
कौन हैं नाराज कांग्रेस विधायक?
दिल्ली जाकर पार्टी हाईकमान से मिलने वाले विधायकों में शामिल हैं—
- राजेश कश्यप (कांग्रेस विधायक दल के उपनेता)
- नमन विक्सल कोंगाड़ी
- सुरेश बैठा (कांके विधायक)
- सोना राम सिंकू
- भूषण बारला
इन विधायकों ने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस कोटे के मंत्री न तो जनप्रतिनिधियों की बात सुन रहे हैं और न ही कार्यकर्ताओं व आम जनता के मुद्दों पर गंभीरता दिखा रहे हैं।
शिकायतें गंभीर, मंत्री दिल्ली तलब
विधायकों की नाराजगी को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने बड़ा फैसला किया है। जानकारी के मुताबिक, पार्टी कोटे से सरकार में शामिल सभी चार मंत्रियों राधाकृष्ण किशोर, डॉ. इरफान अंसारी, दीपिका पांडेय सिंह और शिल्पी नेहा तिर्की को दिल्ली बुलाया गया है।
बताया जा रहा है कि 28 जनवरी (बुधवार) को राहुल गांधी स्वयं मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं से बातचीत कर स्थिति की समीक्षा करेंगे।
“संगठन से ऊपर कोई नहीं”
दिल्ली से लौटने के बाद विधायक दल के उपनेता राजेश कश्यप ने साफ शब्दों में कहा कि “संगठन से बड़ा कोई नहीं होता। जब संगठन मजबूत होगा, तभी सरकार और मंत्री मजबूत रहेंगे। आज हालत ये है कि अपने ही विधायकों के काम नहीं हो रहे, जिससे कार्यकर्ता और जनता दोनों नाराज हैं। हमने हाईकमान को सच्चाई बताई है ताकि पार्टी को नुकसान न हो।”
विकास कार्यों में ठहराव का आरोप
कांके से विधायक सुरेश बैठा ने भी मंत्रियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि “यह किसी व्यक्तिगत विरोध की बात नहीं है, बल्कि राज्य और जनता के हित का मामला है। कृषि, सड़क, नाली, स्वास्थ्य जैसे अहम क्षेत्रों में काम ठप पड़ा है। बैठक मांगने पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जाती है। हमने हाईकमान को आईना दिखाने का काम किया है।” उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी नेतृत्व ने आश्वासन दिया है कि मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा होगी और आगे का फैसला उसी आधार पर लिया जाएगा।
अब दिल्ली की बैठक पर टिकी निगाहें
झारखंड कांग्रेस में उभरी यह अंदरूनी कलह गठबंधन सरकार के लिए भी चेतावनी मानी जा रही है। अब सबकी नजरें दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर टिकी हैं। आने वाले दिन झारखंड की सियासत के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।