जंग के बीच ईरान ने पहली बार दागी 'डांसिंग मिसाइल', 2000km तक मार करने की क्षमता, इजराइल-US ठिकानों को बनाया निशाना

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 12:16 AM

amidst the war iran fires dancing missile for the first time

मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने रविवार को उन्नत मिसाइलों की एक नई श्रृंखला दागी। इन हमलों में पहली बार Sejjil Missile का इस्तेमाल किया गया। ईरान के सरकारी मीडिया Press TV के अनुसार इस मिसाइल से इजराइल और अमेरिका के ठिकानों को निशाना बनाया...

इंटरनेशनल डेस्कः मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान ने रविवार को उन्नत मिसाइलों की एक नई श्रृंखला दागी। इन हमलों में पहली बार Sejjil Missile का इस्तेमाल किया गया। ईरान के सरकारी मीडिया Press TV के अनुसार इस मिसाइल से इजराइल और अमेरिका के ठिकानों को निशाना बनाया गया।

यह मिसाइल युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार इस्तेमाल की गई है। यह संघर्ष 28 फरवरी से जारी है और लगातार तेज होता जा रहा है।

क्या है सेज्जिल ‘डांसिंग मिसाइल’

ईरान की सेज्जिल-2 एक दो-स्टेज (Two-Stage) ठोस ईंधन (Solid Fuel) से चलने वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है। इसकी मारक क्षमता करीब 2000 किलोमीटर तक बताई जाती है और यह लगभग 700 किलोग्राम तक का पेलोड ले जा सकती है। इस मिसाइल को “डांसिंग मिसाइल” भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यह ऊंचाई पर उड़ान भरते समय दिशा बदलने और तेजी से मैन्युवर करने में सक्षम होती है, जिससे दुश्मन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को चकमा देना आसान हो जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मिसाइल Iron Dome जैसी एयर डिफेंस प्रणालियों से बच निकलने में सक्षम हो सकती है।

आकार और तकनीकी विशेषताएं

अमेरिका के थिंक-टैंक Center for Strategic and International Studies के अनुसार सेज्जिल मिसाइल की लंबाई करीब 18 मीटर है और इसका व्यास लगभग 1.25 मीटर है। इसका कुल वजन करीब 23,600 किलोग्राम बताया जाता है।

इसका ठोस ईंधन सिस्टम इसे रणनीतिक बढ़त देता है क्योंकि इसे पुराने तरल ईंधन वाले सिस्टम की तुलना में बहुत जल्दी तैयार कर लॉन्च किया जा सकता है। ईरान की पुरानी Shahab Missile सीरीज तरल ईंधन पर आधारित थी, जिसे लॉन्च से पहले ज्यादा तैयारी की जरूरत होती थी।

1990 के दशक में शुरू हुआ था विकास

सेज्जिल मिसाइल के डिजाइन और विकास पर काम 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था। इसका पहला परीक्षण 2008 में किया गया था, जिसमें यह मिसाइल करीब 800 किलोमीटर तक गई थी। इसके बाद मई 2009 में दूसरी बार इसका परीक्षण किया गया, जिसमें बेहतर गाइडेंस और नेविगेशन सिस्टम की जांच की गई। 2009 के बाद भी इसके कई फ्लाइट टेस्ट किए गए। छठे परीक्षण के दौरान यह मिसाइल करीब 1900 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए हिंद महासागर तक पहुंची थी।

युद्ध का 16वां दिन

मध्य-पूर्व में चल रहा यह युद्ध अब 16वें दिन में पहुंच चुका है। पिछले महीने अमेरिका और इजराइल ने ईरान के ठिकानों पर संयुक्त हमले किए थे। इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे क्षेत्र में युद्ध फैल गया। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू कर दिए। वहीं इजराइल और अमेरिका भी लगातार ईरान के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं।

हजारों लोगों की मौत

रिपोर्ट्स के अनुसार इस युद्ध में अब तक 2000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें अधिकांश लोग ईरान के हैं। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय Pentagon के मुताबिक युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिका और इजराइल की सेनाओं ने ईरान में 15,000 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए हैं।

अमेरिका ने भेजा युद्धपोत

इस बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अमेरिका ने USS Tripoli नामक युद्धपोत को करीब 2,500 मरीन सैनिकों के साथ मध्य-पूर्व क्षेत्र में भेजा है, ताकि युद्ध की स्थिति में अमेरिकी हितों की रक्षा की जा सके।

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