Edited By Rohini Oberoi,Updated: 18 Jul, 2026 02:34 PM

राजस्थान के जोधपुर जिले से चिकित्सा तंत्र को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के प्रसिद्ध अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक 24 साल की महिला को कथित तौर पर गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया।
नेशनल डेस्क। राजस्थान के जोधपुर जिले से चिकित्सा तंत्र को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के प्रसिद्ध अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक 24 साल की महिला को कथित तौर पर गलत ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया गया। इस जानलेवा गलती के कारण महिला की किडनी पूरी तरह फेल हो गई और उनकी हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। मरीज की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए उन्हें आज भी ICU में कड़ी निगरानी और निरंतर डायलिसिस पर रखा गया है।
जानकारी के लिए बता दें कि जोधपुर के डावरा बावरी गांव की रहने वाली धापू भील (24 वर्ष) ने 11 जुलाई को एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया था। डिलीवरी सामान्य (नॉर्मल) थी लेकिन शरीर में खून की अत्यधिक कमी (गंभीर एनीमिया) और प्रसव के बाद होने वाली अन्य जटिलताओं के चलते उन्हें तुरंत उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया।
अस्पताल में पहले दिन महिला को उनका असली ब्लड ग्रुप यानी 'O-पॉजिटिव' (O+) खून चढ़ाया गया जिससे उनकी स्थिति में सुधार हो रहा था। लापरवाही का असली खेल 12 जुलाई की रात को खेला गया जिसने हंसते-खेलते परिवार को तबाही के मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया। 12 जुलाई की रात को जब धापू को दूसरी बार खून चढ़ाने की बारी आई तो ड्यूटी स्टाफ ने घोर लापरवाही बरतते हुए उन्हें 'O-पॉजिटिव' के बजाय 'B-पॉजिटिव' (B+) ब्लड ग्रुप का खून चढ़ा दिया।
पीड़ित परिवार के मुताबिक गलत खून चढ़ते ही धापू का शरीर बुरी तरह कांपने लगा। कुछ ही मिंटों में उनके यूरिन कलेक्शन बैग में गहरे लाल रंग का खून आने लगा जो इस बात का साफ संकेत था कि गलत खून ने अंदरूनी अंगों को तबाह करना शुरू कर दिया है। महिला की किडनी ने काम करना बंद कर दिया, पेशाब आना बंद हो गया और शरीर के अन्य हिस्सों से भी ब्लीडिंग शुरू हो गई।
यह भी पढ़ें: बेटे से मिलने की जिद में किडनैपर बना पिता, 12 दिन की रेकी, फिर राजस्थान भागा, ऐसे हुआ गिरफ्तार
जब महिला की हालत बेकाबू हो गई तो उम्मेद अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती छुपाते हुए उन्हें तुरंत महात्मा गांधी (MG) अस्पताल के आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। पीड़ित महिला के पति किशनाराम ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि डॉक्टरों ने उन्हें कभी नहीं बताया कि उनकी पत्नी की हालत गलत खून चढ़ाने से बिगड़ी है। उन्हें बिना कोई संतोषजनक कारण बताए बस दूसरे अस्पताल भेज दिया गया।
अस्पताल के अंदरूनी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक उम्मेद अस्पताल के उसी वार्ड में दो महिलाओं के नाम एक जैसे थे और इत्तेफाक से उनके पतियों के नाम भी बिल्कुल एक समान थे। दूसरी महिला का ब्लड ग्रुप 'B-पॉजिटिव' था। स्टाफ ने बिना कागजात और पहचान की ठीक से जांच किए एक महिला का खून दूसरी महिला को चढ़ा दिया।
वहीं महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक फतेह सिंह ने बताया कि गलत ब्लड ट्रांसफ्यूजन (Blood Transfusion Reaction) के कारण मरीज की किडनी पर बहुत बुरा असर पड़ा है। डॉक्टर लगातार डायलिसिस के जरिए उनके शरीर से टॉक्सिन्स निकाल रहे हैं और हालत में बेहद मामूली सुधार देखा गया है।
वहीं, एसएन (SN) मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बीएस जोधा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा, इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। डॉक्टरों या नर्सिंग स्टाफ में से जिसकी भी लापरवाही सामने आएगी उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।