Edited By Tanuja,Updated: 28 May, 2026 02:29 PM

कनाडा में भारतीय राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सामाजिक माध्यम पर वायरल बयान में कनाडाई पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब भारत और कनाडा दोनों तनावपूर्ण रिश्तों को सुधारने और व्यापारिक सहयोग...
International Desk: कनाडा में एक बार फिर खालिस्तान समर्थकों की भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक के काफिले के सामने खालिस्तान समर्थकों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रतिबंधित संगठन सिख फॉर जस्टिस से जुड़े बताए जा रहे कार्यकर्ता इंदरजीत सिंह गोसल ने सुरक्षा घेरा तोड़कर काफिले को रोकने की कोशिश की। बताया जा रहा है कि घटना 26 मई को उस समय हुई जब भारतीय उच्चायुक्त एक कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे थे। प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम की जानकारी पहले से थी और वे वहां पहले ही जमा हो चुके थे। जैसे ही काफिला वहां पहुंचा, इंदरजीत सिंह गोसल अचानक पुलिस बैरिकेड पार कर गाड़ियों के सामने आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और वायरल वीडियो के अनुसार, गोसल ने भारतीय तिरंगा हाथ में लेकर उसे फाड़ने की कोशिश की और फिर उसे पैरों तले रौंदने का प्रयास किया। इस दौरान वहां मौजूद प्रदर्शनकारी भारत विरोधी और खालिस्तान समर्थक नारे लगा रहे थे। भीड़ में कुछ लोग हरदीप सिंह निज्जर की हत्या का मुद्दा उठाते हुए भारत सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी कर रहे थे। कनाडा में भारत-कनाडा संबंधों को लेकर एक बार फिर नई बहस शुरू हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक बयान में दावा किया गया कि “भारतीय राजनयिक पाकिस्तान की सड़कों पर कनाडा की तुलना में ज्यादा सुरक्षित रहे हैं।” इस बयान में यह भी आरोप लगाया गया कि कनाडा में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान स्थानीय पुलिस की भूमिका सवालों के घेरे में रही।
वायरल टिप्पणी में कहा गया कि जिस समय भारतीय काफिला गुजर रहा था, उस दौरान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पर्याप्त पुलिस बल मौजूद नहीं था। बयान में यह भी कहा गया कि ऐसी घटनाएं “स्थानीय प्रशासन और पुलिस के सहयोग” के बिना संभव नहीं हो सकतीं। इसके साथ ही भारत के प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयलसे कनाडा के साथ संबंधों पर दोबारा विचार करने की अपील की गई। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब भारत और कनाडा पिछले कुछ वर्षों से तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों देशों के रिश्तों में गिरावट 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद आई थी। कनाडा ने भारत पर गंभीर आरोप लगाए थे, जिन्हें भारत ने पूरी तरह खारिज कर दिया था। इसके बाद दोनों देशों ने एक-दूसरे के कई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।
इंदरजीत सिंह गोसल वही व्यक्ति बताया जा रहा है जिसे हाल ही में कनाडाई पुलिस ने “थ्रेट टू लाइफ” श्रेणी के तहत सुरक्षा की पेशकश की थी। घटना के बाद उसने अपने कृत्य को सही ठहराने की कोशिश करते हुए आरोप लगाया कि भारतीय उच्चायुक्त ने उसे मारने के लिए 50 हजार डॉलर की सुपारी दी है। हालांकि उसने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया। हाल ही में कनाडाई मीडिया मंच The Globe and Mail में प्रकाशित एक रिपोर्ट और इंटरव्यू ने भी इस बहस को और तेज कर दिया। रिपोर्ट में भारत-कनाडा संबंधों, खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और राजनयिक तनाव से जुड़े कई दावों का उल्लेख किया गया था, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्तों पर फिर चर्चा शुरू हो गई।
भारत और कनाडा के बीच संबंध 2023 में खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद काफी तनावपूर्ण हो गए थे। दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित किया था और कई उच्च स्तरीय वार्ताएं प्रभावित हुई थीं। हालांकि हाल के महीनों में रिश्तों को सामान्य बनाने की कोशिशें जारी थीं, लेकिन वैंकूवर की यह घटना फिर नई चिंता बन गई है। वैंकूवर में भारतीय उच्चायुक्त दिनेश पटनायक के काफिले के सामने खालिस्तानी समर्थकों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी इंदरजीत सिंह गोसल ने सुरक्षा घेरा तोड़कर तिरंगा फाड़ने की कोशिश की। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद कनाडा की सुरक्षा व्यवस्था और खालिस्तानी गतिविधियों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।