TMC में बगावत की आग: कीर्ति आजाद का दावा— 'BJP का ऑपरेशन लोटस फेल, हम डरने वाले नहीं'

Edited By Updated: 12 Jun, 2026 02:52 PM

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तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा ऑपरेशन लोटस के जरिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक पार्टी को विभाजित करने के प्रयास विफल.....

News Delhi: तृणमूल कांग्रेस के सांसद कीर्ति आजाद ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि भाजपा ऑपरेशन लोटस के जरिए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक पार्टी को विभाजित करने के प्रयास विफल रहे हैं।

आजाद ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बराइक के इस्तीफे और भाजपा नेता निशिकांत दुबे के दिल्ली स्थित आवास के बाहर उनकी मीडिया से बातचीत, बागी तृणमूल सांसदों की केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई बैठक तथा भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी के तृणमूल सांसद शताब्दी रॉय के घर जाने को पार्टी को कमजोर करने की संगठित कोशिश का प्रमाण बताया। आजाद ने कहा कि (गृह मंत्री) अमित शाह के मार्गदर्शन में ऑपरेशन लोटस चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह अभियान अब तक सफल नहीं हो पाया है। तृणमूल में उथल-पुथल के बीच पार्टी के 19 लोकसभा सांसदों के नाम और हस्ताक्षरों वाली एक कथित सूची ऑनलाइन प्रसारित हुई। हालांकि, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित कथित पत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

बागी तृणमूल नेताओं ने दावा किया कि इस दस्तावेज से उनके कदम के समर्थन का संकेत मिलता है। इस दस्तावेज की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी। सूची में काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार मल, अरूप चक्रवर्ती, रचना बनर्जी, सायोनी घोष, खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, यूसुफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मालिया और पार्थ भौमिक के हस्ताक्षर थे।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के एक बड़े वर्ग के विधायकों के विद्रोह के बाद तृणमूल संकट में घिर गई। बाद में यह संकट संसद तक पहुंच गया, जहां बागी सांसदों ने 20 से अधिक लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया। गुरुवार को प्रकाश चिक बराइक इस सप्ताह पार्टी और राज्यसभा दोनों से इस्तीफा देने वाले तीसरे तृणमूल सांसद बन गए। इससे पहले सुखेंदु शेखर राय और सुष्मिता देव भी इस्तीफा दे चुके हैं। इस संकट ने पार्टी के भीतर मौजूद मतभेदों को भी उजागर कर दिया।

वरिष्ठ तृणमूल नेता कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला किया और कहा कि वह तभी पार्टी में रहेंगे जब अभिषेक को सभी नेतृत्व पदों से हटाया जाएगा। कल्याण बनर्जी की टिप्पणियों को ज्यादा महत्व न देते हुए आजाद ने कहा कि वरिष्ठ सांसद अब भी ममता बनर्जी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। आजाद ने एक न्यूज एजेंसी से कहा कि सब कुछ ठीक है, कोई समस्या नहीं है। कल्याण बनर्जी भावुक हैं। वह बुरे समय में दीदी के साथ रहे हैं। वह कभी उनके साथ विश्वासघात नहीं कर सकते और न ही उनकी पीठ में छुरा घोंप सकते हैं।

बगावत तेज होने के बावजूद कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से ममता बनर्जी के प्रति अपना समर्थन दोहराया। लोकसभा सदस्य सौगत रॉय, शत्रुघ्न सिन्हा, प्रतिमा मंडल और राज्यसभा सदस्य बाबुल सुप्रियो ने बागी गुट का हिस्सा होने से इनकार करते हुए कहा कि वे पार्टी के साथ बने रहेंगे। आजाद ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल नेताओं पर सुरक्षा कर्मियों को हटाकर दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन उन्होंने कहा कि ऐसे कदम उन्हें डराने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि क्या आपको लगता है कि हम डरने वाले लोग हैं? यदि हम संघर्ष के लिए राजनीति में आए हैं, तो हम यह लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि मैं एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर भी रहा हूं और मेरी अपनी पहचान और प्रतिष्ठा है। कीर्ति डरने वालों में से नहीं है।

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