Edited By ,Updated: 10 Aug, 2016 10:04 PM

दुनिया में अधिकतर मोबाइल यूजर्स फोन रिसीव करते ही हैलो बोलते है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फोन उठाते समय पहले हम हैलो ही क्यो बोलते...
जालंधर: दुनिया में अधिकतर मोबाइल यूजर्स फोन रिसीव करते ही हैलो बोलते है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि फोन उठाते समय पहले हम हैलो ही क्यो बोलते हैं? या फिर हैलो के अलावा और कुछ क्यों नहीं कहते। तो आज हम आपको बताने जा रहे है कि आखिर फोन पर बात करने से पहले हैलो क्यो कहा जाता है।
ऑक्सफोर्ड इंग्लिश डिक्शनरी के अनुसार हैलो शब्द पुराने जर्मन शब्द हाला, होला से बना है, जिसका इस्तेमाल नाविक करते थे। ये शब्द पुराने फ्रांसीसी या जर्मन शब्द ‘होला’ से निकला है। इसका मतलब होता है ‘कैसे हो’ यानी, हाल कैसा है जनाब का? अंग्रेज कवि चॉसर के जमाने में यानी 1300 के बाद ये शब्द हालो (hallow) बन चुका था। इसके दो सौ साल बाद यानी शेक्सपियर के जमाने में हालू (Halloo) बन गया। फिर ये शिकारियों और मल्लाहों के इस्तेमाल से कुछ और बदला और हालवा, हालूवा,होलो (hallloa, hallooa, hollo) बना।
आर यू देयर की जगह टॉमस एडीसन ने कहा हलो
बहरहाल जब टेलीफोन का आविष्कार हुआ तो शुरूआत में लोग फोन पर पूछा करते थे ‘आर यू देयर?’ तब उन्हें यह विश्वास नहीं था कि उनकी आवाज दूसरी ओर पहुंच रही है, लेकिन अमेरिकी आविष्कारक टॉमस एडीसन को इतना लंबा वाक्य पसंद नहीं था। उन्होंने जब पहली बार फोन किया तो उन्हें यकीन था कि दूसरी ओर उनकी आवाज पहुंच रही है। उन्होंने कहा, हलो।
ग्राहम बैल ने कहा था हैलो
10 मार्च 1876 को अलेक्जेंडर ग्राहम बैल के टेलीफोन आविष्कार को पेटेंट मिला। वे शुरू में टेलीफोन पर बात शुरू करने के लिए नाविकों के शब्द ‘हाय’ का इस्तेमाल करते थे। उनकी गर्लफ्रेंड का नाम था हैल्लो। जिसका पूरा नाम मारग्रेट हैलो था। वे जब कभी उनसे फोन करते तो प्यार से उने हैल्लो बोलते थे। और मिलते तो हैल्लो कहकर पुकारते थे। बस वही से इस शब्द की शुरुआत हुई। जिसे आज हम सभी बोलते है।