‘वकालत कमजोर दिल वालों के लिए नहीं’, लॉ स्टूडेंट्स को CJI ने दी नसीहत, कहा- ‘जो सही है, उसके पक्ष में खड़े होने का साहस रखें’

Edited By Updated: 17 Oct, 2026 03:56 PM

law practice is not for the faint hearted  cji advises law students adding

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों से न्याय एवं स्वतंत्रता की रक्षा करने और संवैधानिक मूल्यों को लेकर प्रतिबद्ध रहने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि कानूनी पेशे में साहस, ईमानदारी और उन लोगों की...

बेंगलुरु: भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्रों से न्याय एवं स्वतंत्रता की रक्षा करने और संवैधानिक मूल्यों को लेकर प्रतिबद्ध रहने का आह्वान करते हुए शनिवार को कहा कि कानूनी पेशे में साहस, ईमानदारी और उन लोगों की बात सुनने की क्षमता होनी चाहिए जिनकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यहां 'नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी' (एनएलएसआईयू) के 34वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों को अलग-अलग विचारों को समझने और समाज की सेवा करने के लिए भी तैयार करना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''मैं आपको न केवल बधाई देता हूं, बल्कि मुझे आपसे बहुत उम्मीदें भी हैं।

न्याय के पक्ष में खड़े होने का साहस जरूरी
उन्होंने कहा, ''कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल आपराधिक या संवैधानिक कानून के सिद्धांतों को सीखना नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों से मिलने और उनके विचारों को समझने का अनुभव हासिल करना भी है, जो दुनिया को हमसे अलग नजरिए से देखते हैं।'' न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कानूनी पेशे की जिम्मेदारियों पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए केवल कानूनों और अदालतों के पुराने फैसलों की जानकारी होना ही काफी नहीं है, बल्कि न्याय के पक्ष में खड़े होने का साहस और उन लोगों की चिंताओं को सुनने की विनम्र भाव भी जरूरी है, जिनकी आवाज को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

वकालत का पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं
उन्होंने कहा, ''वकालत का पेशा कमजोर दिल वालों के लिए नहीं है। इसमें केवल कानूनों और अदालतों के पुराने फैसलों की गहरी समझ ही नहीं, बल्कि जो सही है उसके पक्ष में खड़े होने का साहस और अक्सर अनसुने रह जाने वाले लोगों की बात सुनने के लिए विनम्रता भी जरूरी है।'' प्रधान न्यायाधीश ने विद्यार्थियों को आगाह किया कि वे अपनी सुविधा के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता न करें और पेशेवर जीवन में सफलता पाने के लिए आसान रास्ते न अपनाएं। उन्होंने छात्रों से कहा कि वे इस संस्थान में सीखे गए मूल्यों को हमेशा अपने जीवन में बनाए रखें और उन्हीं के अनुसार काम करें।

कानूनी पेशे के जरिए समाज की सेवा
कानूनी पेशे के जरिए समाज की सेवा करने से मिलने वाले संतोष का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वकीलों को अन्याय दूर करने, लोगों की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करने और संविधान के मूल्यों को बनाए रखने से संतुष्टि मिल सकती है। न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने छात्रों से देश के प्रति अपनी व्यापक जिम्मेदारी समझने की अपील करते हुए कहा कि राष्ट्र उनसे केवल वकील के रूप में काम करने की ही नहीं, बल्कि समाज के लिए योगदान देने की भी अपेक्षा करता है। उन्होंने कहा, ''जब आप इस संस्थान से निकलकर दुनिया में कदम रखेंगे, तो याद रखिएगा कि देश आपको केवल कानून के पेशेवरों के रूप में नहीं, बल्कि उम्मीद की किरण के रूप में देखता है।

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