Edited By Niyati Bhandari,Updated: 15 Oct, 2026 11:27 AM
6th day of Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की पूजा। जानें दिव्य स्वरूप, पीला भोग, शीघ्र विवाह के अचूक उपाय, 108 बार जाप के लिए सिद्ध मंत्र और महिषासुर वध की पौराणिक कथा।
Navratri 2026 Day 6: शारदीय नवरात्रि के छठे दिन नवदुर्गा के छठे दिव्य स्वरूप मां कात्यायनी की उपासना का विशेष विधान है। स्वर्णिम आभा और सिंह की सवारी वाली मां कात्यायनी साहस, शक्ति और विजय की प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेषकर जिन जातकों के विवाह में बाधाएं आ रही हैं या मनचाहा जीवनसाथी पाने की इच्छा है, उनके लिए छठा दिन अत्यंत फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं मां कात्यायनी का दिव्य स्वरूप, प्रिय भोग, पूजन विधि, चमत्कारी विवाह उपाय और पावन व्रत कथा।
नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में से छठी मां कात्यायनी की पूजा करने का विधान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कात्यायनी की आराधना करने से जातक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही जीवन में चली आ रही परेशानियों से निजात मिलती है और हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। मां कात्यायनी की पूजा विधि पूर्वक करने के साथ-साथ उनकी व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
मां कात्यायनी का स्वरूप
मां कात्यायनी का वर्ण सुनहरा (स्वर्णिम) है। माता की चार भुजाएं हैं और वे रत्नों से सुशोभित रहती हैं। वे शेर (सिंह) पर सवार होती हैं। उनके दाहिने ऊपरी हाथ में अभय मुद्रा है, जो भक्तों को आशीर्वाद देती है। नीचे वाला दाहिना हाथ वर मुद्रा में है। बाएं ऊपरी हाथ में चंद्रहास नामक तलवार है, जबकि नीचे वाले बाएं हाथ में कमल का फूल है। यह स्वरूप साहस, शक्ति और विजय का प्रतीक है।
मां कात्यायनी का भोग
मां कात्यायनी को पीले रंग की मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। विशेष रूप से बेसन का हलवा, पीली बर्फी, केसर वाली मिठाई या पीले फल अर्पित करें। भोग लगाते समय मंत्र जाप करते रहें। ऐसा करने से मां प्रसन्न होती हैं और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।

मां कात्यायनी की पूजा विधि
नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के कात्यायनी स्वरूप की पूजा करें सुबह नहाने के बाद पीले रंग का वस्त्र धारण करें। मंदिर या पूजा की जगह को गंगा जल से शुद्ध कर लें। पूजा प्रारंभ करने से पहले मां को स्मरण करें और हाथ में फूल लेकर संकल्प लें। मां को फूल अर्पित करें। इसके बाद कुमकुम, अक्षत, फूल आदि और सोलह श्रृंगार चढ़ाएं। फिर मां कात्यायनी को प्रिय भोग शहद-मिठाई इत्यादि का भोग लगाएं देसी घी का दीपक जलाएं और माता की आरती करें।
अच्छे वर-वधू के लिए करें ये उपाय
मां कात्यायनी की पूजा करने से रोग-शोक, कष्ट और भय दूर हो जाते हैं इसके साथ ही इनकी पूजा से शीघ्र विवाह के योग बनते हैं. जिन लोगों की शादी में देर हो रही है, उन्हें शीघ्र विवाह या प्रेम संबंधी मामलों के लिए चैत्र नवरात्रि के छठे दिन शाम को मां कात्यायनी को हल्दी की तीन गांठ चढ़ाएं। सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए पीले फूल चढ़ाते हुए ‘ॐ कात्यायनी महामये महायोगिन्यधीश्वरी। नंद गोप सुतं देहि पतिं में कुरुते नम:।।’ मंत्र का 108 बार जाप करें। ऐसा करने पर विवाह का योग बनेगा।

मूल मंत्र
ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥
प्रार्थना मंत्र
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना। कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥
स्तुति मंत्र
या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
बीज मंत्र
क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नमः॥

मां कात्यायनी की कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि कात्यायन ने संतान प्राप्ति के लिए देवी भगवती की कठोर तपस्या की। महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। एक बार जब महिषासुर नामक दैत्य का अत्याचार बहुत बढ़ गया, जिससे सभी परेशान हो गए।
तब त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के तेज से देवी उत्पन्न हुईं, जिसने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया, जिस कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता रानी के घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद ऋषि कात्यायन ने सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद मां कात्यायनी ने दशमी तिथि पर महिषासुर का वध किया, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना गया।
यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
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