Edited By Niyati Bhandari,Updated: 16 Oct, 2026 11:53 AM

7th day of Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की विशेष पूजा की जाती है। जानिए, देवी के भयंकर स्वरूप का रहस्य, सरल पूजन विधि, प्रिय भोग (गुड़-चना), सिद्ध मंत्र और रक्तबीज वध की पावन कथा।
7th day of Shardiya Navratri 2026: नवरात्रि के सातवें दिन माता कालरात्रि की पूजा करने का विधान है। देवी कालरात्रि वह स्वरूप हैं, जिन्होंने शुम्भ और निशुम्भ नामक राक्षसों का वध करने हेतु अपनी स्वर्णिम त्वचा को हटा दिया था। कालरात्रि माता मां पार्वती का सबसे उग्र तथा भयंकर रूप मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कालरात्रि की पूजा करने से रोग, भय व कष्ट आदि का नाश होता है। देवी कालरात्रि गधे पर सवार हैं, जिन्हें चतुर्भुज रूप में दर्शाया गया है। माता के दाहिने हाथ अभय एवं वरद मुद्रा में दर्शाये गए हैं और वह अपने बायें हाथ में तलवार एवं लोह का घातक अंकुश धारण करती हैं।
नवरात्रि के सातवें दिन का महत्व
नवरात्रि के सातवें दिन को सप्तमी भी कहा जाता है। इस दिन माता के कालरात्रि स्वरूप की आराधना करने का विधान है। ‘देवी कालरात्रि’ भगवती का विकराल रूप है। देवी कालरात्रि जीवन में कष्टों, बाधाओं से मुक्ति और खुशियों का संचार करती है। सच्चे मन से की गई इनकी पूजा आराधना से मनुष्य को सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है। जातकों को सभी तरह की नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा मिलता है और वो सभी सुखों को प्राप्त करता है।
मां कालरात्रि की पूजा विधि
शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात साफ वस्त्र धारण करें। फिर, पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करें। एक लकड़ी की चौकी स्थापित करें और उस पर लाल कंबल का आसन बिछाएं। माता कालरात्रि की प्रतिमा या मूर्ति आसन पर रखें। देवी के सामने घी का दीपक अवश्य जलाएं और उन्हें रोली, अक्षत, गुड़हल के फूल आदि जरूर अर्पित करें।
सभी सामग्री मां कालरात्रि को अर्पित करने के पश्चात विधि-विधान से आरती व पूजा करें। साथ ही, पूरे परिवार के साथ माता के जयकारे लगाने चाहिए।
मां कालरात्रि की आरती में कपूर जरूर शामिल करना चाहिए और उन्हें गुड़ का भोग लगाएं। इस दिन दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। मां कालरात्रि की पूजा में उनके मंत्रों का जाप अवश्य करें। साथ ही, दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।

नवरात्रि के सातवें दिन का भोग
नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि को गुड़ और चने का भोग लगाना शुभ माना जाता है। इसके अलावा मां को शहद का भोग भी अर्पित किया जा सकता है।
नवरात्रि के सातवें दिन का मंत्र
ॐ देवी कालरात्र्यै नमः॥
जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्ति हारिणि। जय सार्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥
नवरात्रि के सातवें दिन का रंग
नीला, काला और ग्रे

नवरात्रि के सातवें दिन की कथा
नवरात्रि के सातवें दिन की कथा अनुसार प्राचीन समय में शुंभ-निशुंभ और रक्तबीज नाम के राक्षस थे। जिन्होंने हर जगह आतंक मचा रखा था। इनके आतंक से परेशान देवी-देवता भगवान शिव के पास गए और इस समस्या से बचाव का उपाय पूछा। जिसके बाद महादेव ने देवी पार्वती से इन राक्षसों का वध करने के लिए कहा। तब मां पार्वती ने मां दुर्गा का रूप धारण किया और शुंभ-निशुंभ का वध कर दिया। लेकिन जब रक्तबीज का वध करने की बारी आई, तो उसके शरीर के रक्त से लाखों की संख्या में रक्तबीज दैत्य उत्पन्न हो गए। क्योंकि रक्तबीज को ऐसा वरदान था कि अगर उनके रक्त की बूंद धरती पर गिरती है, तो उसके जैसा एक और दानव उत्पन्न हो जाएगा। ऐसे में दुर्गा ने अपने तेज से मां कालरात्रि को उत्पन्न किया। मां कालरात्रि ने उसके शरीर से निकलने वाले रक्त को जमीन पर गिरने से पहले ही अपने मुख में भर लिया। इस तरह से रक्तबीज का अंत हुआ।
यूपी रत्न विभूषित, ज्योतिषाचार्य
महंत पं. सुधांशु तिवारी
मुख्य प्रवक्ता व टीवी पैनलिस्ट
संपर्क सूत्र - 9005804317, 7054594317
