सिर से उठा पिता का साया पर नहीं टूटा हौसला, घर में मची थी चीख-पुकार लेकिन जांबाज जान्हवी दे रही थी 12वीं का पेपर, आंसुओं के बीच...

Edited By Updated: 12 Feb, 2026 01:49 PM

maharashtra s braveheart janhavi appeared for her class 12 exam in tears

कहते हैं कि साहस वो नहीं जिसमें डर या दुख न हो बल्कि साहस वो है जो पहाड़ जैसे दुख के सामने भी अडिग रहे। महाराष्ट्र के भंडारा जिले की जान्हवी राहांगडाले ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जिस समय घर में पिता का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई का इंतजार कर रहा था...

नेशनल डेस्क। कहते हैं कि साहस वो नहीं जिसमें डर या दुख न हो बल्कि साहस वो है जो पहाड़ जैसे दुख के सामने भी अडिग रहे। महाराष्ट्र के भंडारा जिले की जान्हवी राहांगडाले ने कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। जिस समय घर में पिता का पार्थिव शरीर अंतिम विदाई का इंतजार कर रहा था उस वक्त जान्हवी अपने पिता के सपने को सच करने के लिए परीक्षा केंद्र में सवालों के जवाब लिख रही थी।

हादसे ने छीना पिता का साया

घटना भंडारा जिले के तुमसर तालुका के आंबागड गांव की है। जान्हवी के पिता, हौशीलाल राहांगडाले का सोमवार दोपहर एक सड़क दुर्घटना में दुखद निधन हो गया। इस खबर ने पूरे परिवार को हिलाकर रख दिया। मंगलवार को जब दुनिया भर के छात्र 12वीं की बोर्ड परीक्षा के पहले पेपर (अंग्रेजी) की तैयारी कर रहे थे तब जान्हवी के घर में मातम पसरा था और उसके पिता का शव सामने रखा था।

पढ़ो और बड़ी बनो: पिता के शब्दों ने दी ताकत

घर में चीख-पुकार और आंखों में आंसुओं का सैलाब होने के बावजूद जान्हवी को अपने पिता की कही बात याद आई— "पढ़ो और बड़ी बनो।" वह जानती थी कि उसके पिता उसे सफल देखना चाहते थे। कलेजे पर पत्थर रखकर जान्हवी ने अपने मामा के बेटे के साथ करीब 8 किलोमीटर का सफर तय किया और परीक्षा केंद्र पहुंची।

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कलम से लिखी हिम्मत की दास्तान

परीक्षा केंद्र में हर सवाल का जवाब लिखते समय जान्हवी की आंखों के सामने उसके पिता का चेहरा घूम रहा था। अंग्रेजी का पेपर पूरा करने के बाद वह तुरंत घर लौटी। जान्हवी के वापस आने के बाद ही उसके पिता का अंतिम संस्कार किया गया।

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पूरे इलाके ने किया सलाम

पिता की मौत के सदमे के बावजूद परीक्षा देने की जान्हवी की इस जिद और जज्बे को देखकर वहां मौजूद शिक्षक और ग्रामीण भावुक हो गए। आज पूरा भंडारा जिला इस बेटी के साहस की सराहना कर रहा है जिसने व्यक्तिगत दुख से ऊपर उठकर अपने पिता के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित की।

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