मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों को हटाने के आदेश को अव्यावहारिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उठाए सवाल

Edited By Updated: 13 Nov, 2025 05:01 PM

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पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने आवारा पशुओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों को अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत को पशुओं के प्रति अपने दृष्टिकोण को करुणा पर केंद्रित करना चाहिए, न कि नियंत्रण...

नेशनल डेस्क: पशु अधिकार कार्यकर्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने आवारा पशुओं के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों को अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि भारत को पशुओं के प्रति अपने दृष्टिकोण को करुणा पर केंद्रित करना चाहिए, न कि नियंत्रण पर। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट द्वारा आवारा कुत्तों को हटाकर निर्दिष्ट आश्रय स्थलों में स्थानांतरित करने वाले निर्देश पर उन्होंने ऐतराज जताया है।

नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में मेनका गांधी ने इस आदेश पर अपनी राय रखते हुए कहा, "सुप्रीम कोर्ट कहता है कि कुत्ते को हटाओ, बिल्ली को हटाओ, बंदर को हटाओ, उसे आश्रय में रखो, उसकी नसबंदी करो... लेकिन कोई भी वास्तव में ऐसा नहीं कर सकता... यह अव्यावहारिक है।" उन्होंने नगर निकायों के बीच कार्डिनेशन पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों और नागरिकों से सामुदायिक जिम्मेदारी और मानवीय देखभाल पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया।

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मेनका गांधी यह बात 'सिनेकाइंड' के उद्घाटन पर कही। यह एक नई पहल है जिसे उनके संगठन पीपल फॉर एनिमल्स (PFA) के सहयोग से भारतीय फिल्म महासंघ ने शुरू किया है। इस पहल का उद्देश्य सिनेमा में दयालुता और मानवीय कहानी कहने को सम्मानित करना है। पुरस्कारों का लक्ष्य फिल्म निर्माताओं को जानवरों और प्रकृति के प्रति सहानुभूति को कमजोरी के बजाय ताकत के रूप में चित्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

गांधी ने कहा, "भारत की संस्कृति काफी हद तक फिल्मों से परिभाषित होती है, और करुणा को मज़बूत दिखाने के लिए उन्हें शामिल करना बहुत ज़रूरी है। कमज़ोर लोग ही क्रूर होते हैं।"

 

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