रिहायशी इमारत में भड़की आग, एक ही परिवार के 3 लोगों की मौत, 2 गंभीर घायल

Edited By Updated: 12 Jun, 2026 10:58 PM

massive fire in residential building 3 members of the same family dead

दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में पांच मंजिला आवासीय इमारत में आग लगने से बोलने में अक्षम एक महिला समेत एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 70 वर्षीय महिला समेत दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस...

नेशनल डेस्क : दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के गोविंदपुरी इलाके में पांच मंजिला आवासीय इमारत में आग लगने से बोलने में अक्षम एक महिला समेत एक परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई जबकि 70 वर्षीय महिला समेत दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आशंका है कि आग शॉर्ट सर्किट के कारण लगी है। उनके मुताबिक, मृतकों की पहचान मोबाइल मरम्मत की दुकान चलाने वाले पंकज (28), बोलने अक्षम उनकी मां गुड्डी (50) और बहन सोनी (20) के तौर पर हुई है। ये सभी इमारत की तीसरी मंज़िल पर रहते थे। उन्होंने बताया कि परिवार के दो अन्य सदस्य- पंकज की एक और बहन मोनी (18) और उनकी 70 वर्षीय नानी गंभीर रूप से घायल हो गईं और उनका उपचार हो रहा है।

निवासियों ने कहा कि इमारत में लगभग नौ परिवार रहते हैं, लेकिन घटना के समय उनमें से कई लोग छुट्टियों पर गए हुए थे। उन्होंने दावा किया कि पड़ोसियों और स्थानीय निवासियों की त्वरित प्रतिक्रिया की वजह से अधिक जान हानि रोकने में मदद मिली। घटना के संबंध में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर) को बृहस्पतिवार और शुक्रवार की दरमियानी रात दो बजकर 31 मिनट पर सूचना दी गई। दक्षिण पूर्वी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) हेमंत तिवारी ने कहा, ''इमारत में घना धुआं भर जाने के कारण कई निवासी अंदर फंस गए थे जिसके बाद समन्वित बचाव अभियान चलाया गया। इमारत से आठ लोगों को निकालकर उन्हें उपचार के लिए सफदरजंग अस्पताल और 'एम्स (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) ट्रॉमा सेंटर' ले जाया गया।''

पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि आग इमारत के भूतल पर बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण लगी होगी और मोटरसाइकिल, स्कूटर और साइकिल सहित कम से कम छह दोपहिया वाहनों में आग लग गई। आपातकालीन सेवाओं के घटना स्थल पर पहुंचने से पहले स्थानीय निवासी इमारत के अंदर फंसे लोगों को निकालने में मदद के लिए मौके पर पहुंचे। स्थानीय निवासी रेनू भूटानी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया, ''कई लोग वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे। मैं उनपर रिकॉर्डिंग बंद करने और अपने घरों से बाल्टियां लाने के लिए चिल्लाया ताकि फंसे हुए लोगों को बचाया जा सके।''

भूटानी ने कहा कि वह और उनका बेटा, कई अन्य लोगों के साथ, अपने घरों से बाल्टियां लेकर आए और आग की लपटों को बुझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि आग भूतल पर लगी और छह-सात दोपहिया वाहनों तक फैल गई। घने काले धुएं ने आवासीय इमारत को घेर लिया। स्थानीय निवासियों ने दावा किया कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दरवाजे तोड़ दिए, आसपास के ढांचों पर चढ़ गए और दमकल कर्मियों के पहुंचने से पहले फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए अस्थायी व्यवस्था की।

निवासियों ने कहा कि यदि पड़ोसियों ने घनी आबादी वाले इलाके में तत्काल बचाव प्रयास शुरू नहीं किए होता मरने वालों की संख्या बहुत अधिक हो सकती थी। इलाके में इमारतें एक दूसरे पूरी तरह से सटी हैं और गलियां सिर्फ ही चौड़ी हैं कि आपातकालीन वाहन उनमें मुश्किल से पहुंच सकते हैं। मदद के लिए चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे स्थानीय दुकानदार पवन ने कहा कि आग का धुआं तेजी से इमारत में ऊपर की ओर बढ़ रहा था। उन्होंने कहा, "घना धुआं ऊपरी मंजिल की ओर बढ़ रहा था। कुछ लोगों को सामने की तरफ से बाहर लाया गया, जबकि अन्य को पीछे की तरफ से निकाला गया। निवासियों ने लोगों को नीचे उतारने में मदद करने के लिए रस्सियां और यहां तक कि साड़ियां भी बांध दीं।"

निवासियों के अनुसार, बचाव अभियान के दौरान संकरी गलियां और पास-पास बने घर महत्वपूर्ण हो गए। लोगों ने पड़ोसी मकानों की छतों के बीच लकड़ी के तख्ते रखे और छतों के ऊपर से चढ़कर उन लोगों तक पहुंचे जो अंदर फंसे हुए थे। कई निवासियों ने ग्रिल तोड़ने और लोगों को निकलने का रास्ते बनाने के लिए लोहे के कटर का भी इस्तेमाल किया। पवन ने कहा कि छत का दरवाजा बंद होना बड़ी बाधाओं में से एक था। उन्होंने कहा, "छत का द्वार बंद था। अगर इसे समय पर खोला जाता, तो शायद स्थिति अलग होती।

दमकल और स्थानीय निवासियों ने बुजुर्ग मां को बाहर निकाला और सीपीआर देकर उन्हें होश में लाने की कोशिश की।" निवासियों ने कहा कि पंकज का परिवार लगभग दो साल पहले इमारत में रहने आया था। उनकी मां बोलने में असमर्थ थीं और ज्यादातर इशारों के जरिए बातचीत करती थीं। एक पड़ोसी ने कहा, "वह बोल नहीं सकती थी, लेकिन वह सब कुछ समझती थी और संकेतों के माध्यम से हमें बताती थी कि उन्हें क्या चाहिए।" दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि जिस कॉलोनी में इमारत स्थित है वह अनधिकृत बस्ती है। उन्होंने कहा कि इमारत भी बिना मंजूरी के बनाई गई है तथा "हम मामले को देख रहे हैं और जांच जारी है।"

एक अन्य पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच के लिए कई टीमें तैनात की गई हैं। अधिकारी ने कहा, "फोरेंसिक और स्थानीय पुलिस की टीमों ने घटनास्थल का दौरा किया है और वे मामले की जांच कर रही हैं। हम घटनाओं का सही क्रम जानने के लिए आस-पास की इमारतों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी देख रहे हैं।" इस घटना से एक हफ्ते पहले दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में एक होटल में भीषण आग लग गयी थी, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में कई विदेशी नागरिक शामिल हैं जो मुख्य रूप से मध्य एशियाई और अफ़्रीकी देशों से थे। 

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