Edited By Parveen Kumar,Updated: 04 Jul, 2026 01:01 AM

पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 पूरी श्रद्धा और धूमधाम से चल रही है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से आ रहे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा के दौरान अपने अनुभव और प्रतिक्रियाएं...
नेशनल डेस्क : पवित्र श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 पूरी श्रद्धा और धूमधाम से चल रही है। बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए देश के कोने-कोने से आ रहे श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। मिली जानकारी के अनुसार, श्रद्धालु इस पवित्र यात्रा के दौरान अपने अनुभव और प्रतिक्रियाएं उत्साहपूर्वक साझा कर रहे हैं।
यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने कहा कि पहाड़ों की कठिन चढ़ाई के बावजूद, भोलेनाथ के प्रति उनकी श्रद्धा उन्हें आगे बढ़ने की शक्ति दे रही है। सूत्रों के अनुसार, तीर्थयात्रियों ने श्री अमरनाथ जी यात्रा 2026 से जुड़ी अपनी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं का विस्तार से वर्णन किया है। श्रद्धालुओं का कहना है कि दर्शन के बाद मिलने वाली मानसिक शांति को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी।
तीर्थयात्रियों के अनुभव और प्रतिक्रियाएं
आध्यात्मिक अनुभव: कठिन रास्तों पर यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि पूरा रास्ता 'हर-हर महादेव' के जयकारों से गूंजता रहता है। कठिन चढ़ाई के बावजूद, पवित्र बर्फ से बने शिवलिंग (बाबा बर्फानी) के दर्शन मात्र से सारी थकान और परेशानी दूर हो जाती है।
लंगर सेवा: स्वयंसेवकों और लंगर समितियों ने विभिन्न स्थानों पर मुफ्त भोजन, चाय और गर्म पानी की बेहतरीन व्यवस्था की है, जिससे तीर्थयात्रियों को घर जैसा अनुभव होता है।
सुरक्षा व्यवस्था: प्रशासन ने इस वर्ष अतिरिक्त सावधानी बरती है। जम्मू से पहलगाम (नुनवान) और बालटाल बेस कैंप तक की यात्रा सुरक्षा बलों की कड़ी निगरानी और सुव्यवस्थित प्रणालियों के तहत की जा रही है।
स्वच्छता अभियान: बालटाल बेस कैंप में उपराज्यपाल द्वारा शुरू किए गए 'शुभम-शिवम' अभियान (एक ज़ीरो-लैंडफिल पहल) के कारण, तीर्थयात्रियों को एक बेहद स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल मार्ग का अनुभव हो रहा है।
यात्रा के मुख्य चरण
पहलगाम मार्ग (पारंपरिक): यह मार्ग लंबा है (लगभग 36-48 किमी की पैदल यात्रा) लेकिन शारीरिक रूप से कम थकाऊ और बेहद खूबसूरत है। इस मार्ग से यात्रा करने वाले तीर्थयात्री प्राकृतिक दृश्यों और सुंदर घाटियों के अनुभव साझा करते हैं।
बालटाल मार्ग: यह सबसे छोटा मार्ग (लगभग 14 किमी) है लेकिन इसमें बहुत खड़ी चढ़ाई है। यहाँ, यात्री चुनौतीपूर्ण प्राकृतिक परिस्थितियों के बावजूद अटूट आस्था और रोमांच का अनुभव करने की बात करते हैं।
स्थानीय मेहमाननवाज़ी: घाटी के स्थानीय लोग यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा का ध्यान रख रहे हैं। पर्यटक सोशल मीडिया और अलग-अलग प्लैटफ़ॉर्म पर स्थानीय दुकानदारों और कश्मीरी युवाओं से फूल और फल मिलने के अपने अनुभव भी साझा कर रहे हैं।