संविधान ही असली धर्म: मायावती ने प्रयागराज विवाद के बीच नेताओं को याद दिलाई लक्ष्मण रेखा

Edited By Updated: 24 Jan, 2026 01:56 PM

mayawati expressed concern over the intertwining of religion and politics

बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन में जारी विवाद के बीच शनिवार को कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से और राजनीति को...

नेशनल डेस्क: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन में जारी विवाद के बीच शनिवार को कहा कि संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से और राजनीति को धर्म से जोड़ने के कई खतरे हमेशा बने रहते हैं। बसपा प्रमुख ने ‘एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी धर्म के पर्व, त्योहार, पूजा-पाठ और स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप और प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ गया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हस्तक्षेप नए-नए विवाद, तनाव और संघर्ष का कारण बन रहा है, जो उचित नहीं है, और इसी वजह से लोगों में दुख व चिंता की लहर स्वाभाविक है।''

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मायावती ने कहा, ‘‘वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिए धर्म को राजनीति से तथा राजनीति को धर्म से जोड़ने के खतरे हमेशा बने रहते हैं। प्रयागराज में स्नान आदि को लेकर जारी विवाद, एक-दूसरे का अनादर और आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा उदाहरण है। इससे हर हाल में बचा जाना ही बेहतर होगा।'' उन्होंने कहा, ‘‘वैसे भी देश का संविधान और कानून ईमानदारी से जनहित और जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानते हैं और राजनीति को धर्म से तथा धर्म को राजनीति से दूर रखने की बात करते हैं।'' बसपा प्रमुख ने कहा कि इस सोच पर सही नीयत और नीति के साथ अमल होना चाहिए, ताकि नेता बिना किसी द्वेष और पक्षपात के, सर्व समाज के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हित में अपने संवैधानिक दायित्वों का ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन कर सकें। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भी लोगों की यही अपेक्षा है, इसलिए प्रयागराज में स्नान को लेकर जारी विवाद आपसी सहमति से जितनी जल्दी सुलझ जाए, उतना ही बेहतर होगा। इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस के अवसर पर सभी लोगों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं।

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मेला प्रशासन ने सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस जारी कर पूछा था कि वह स्वयं को ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में कैसे प्रचारित-प्रसारित कर रहे हैं, जबकि उच्चतम न्यायालय का आदेश है कि अपील के निस्तारण तक कोई भी धर्माचार्य ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं कर सकता। माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन मेला पुलिस और प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को कथित तौर पर स्नान करने से रोके जाने के बाद से वह खफा हैं और मेला प्रशासन पर निशाना साध रहे हैं। 

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