Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 26 Mar, 2026 10:17 PM

नई दिल्ली से सामने आई ताजा रिपोर्ट ने देश की राजनीतिक फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा किया है। Association for Democratic Reforms (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में भारी उछाल दर्ज किया गया...
नेशनल डेस्क: नई दिल्ली से सामने आई ताजा रिपोर्ट ने देश की राजनीतिक फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा किया है। Association for Democratic Reforms (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में भारी उछाल दर्ज किया गया है। पिछले साल की तुलना में कुल फंडिंग में करीब 161 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई, जो राजनीतिक चंदे के ट्रेंड में बड़ा बदलाव दिखाता है।
BJP को सबसे ज्यादा फंड, बाकी दलों से कहीं आगे
रिपोर्ट के मुताबिक Bharatiya Janata Party को सबसे ज्यादा चंदा मिला है। पार्टी को 20 हजार रुपये से अधिक के हजारों दानों के जरिए कुल 6,074 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि प्राप्त हुई। यह आंकड़ा अन्य सभी राष्ट्रीय दलों के कुल चंदे से कई गुना ज्यादा है, जिससे साफ होता है कि फंडिंग के मामले में बीजेपी का दबदबा कायम है।
कांग्रेस समेत अन्य दलों को कितना मिला चंदा
वहीं Indian National Congress को इस अवधि में 500 करोड़ रुपये से अधिक का चंदा मिला। इसके अलावा आम आदमी पार्टी (आप), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) को अपेक्षाकृत कम राशि प्राप्त हुई। दिलचस्प बात यह रही कि Bahujan Samaj Party ने 20 हजार रुपये से अधिक का कोई चंदा मिलने से इनकार किया है।
पिछले साल के मुकाबले कितना बदला ट्रेंड
रिपोर्ट में बताया गया है कि कुल चंदे की राशि में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। बीजेपी के फंड में करीब 171 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया, जबकि कांग्रेस के चंदे में भी 80 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखने को मिली।
छोटे दलों में भी बढ़ी फंडिंग
अन्य दलों में आम आदमी पार्टी को करीब 27 करोड़ रुपये का चंदा मिला, जिसमें उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं नेशनल पीपुल्स पार्टी के फंड में तो कई गुना की बढ़त देखने को मिली, जो छोटे दलों के लिए भी बदलते राजनीतिक माहौल का संकेत है।
राजनीतिक फंडिंग पर फिर छिड़ी बहस
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद राजनीतिक फंडिंग और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना है। आंकड़े यह दर्शाते हैं कि बड़े दलों को मिलने वाले चंदे का हिस्सा लगातार बढ़ रहा है, जिससे चुनावी राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।