सोमनाथ में बोले पीएम मोदी- तुष्टीकरण की राजनीति राष्ट्रीय आत्मसम्मान की दुश्मन

Edited By Updated: 11 May, 2026 02:56 PM

politics of appeasement is the enemy of national self respect pm modi

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश में कुछ ताकतें अब भी राष्ट्रीय आत्मसम्मान के बजाय तुष्टीकरण की राजनीति को प्राथमिकता दे रही हैं और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विरोध के दौरान भी इसी तरह की सोच दिखाई दी थी। गुजरात के सोमनाथ...

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को कहा कि देश में कुछ ताकतें अब भी राष्ट्रीय आत्मसम्मान के बजाय तुष्टीकरण की राजनीति को प्राथमिकता दे रही हैं और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विरोध के दौरान भी इसी तरह की सोच दिखाई दी थी। गुजरात के सोमनाथ में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के अनेक प्रयास किए थे, लेकिन उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से विरोध का सामना करना पड़ा। भगवान शिव के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव में शामिल होने आए प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव के आगे झुकने को मजबूर नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि 11 मई इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दिन (1998 में) भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे।

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प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा, ''दुनियाभर में ऐसे अनगिनत उदाहरण हैं जहां विदेशी आक्रांताओं ने राष्ट्रीय पहचान से जुड़े स्थानों को तबाह कर दिया। जब भी लोगों को मौका मिला, उन्होंने अपनी विरासत को बहाल किया और उसकी गरिमा को कायम रखा।'' उन्होंने कहा, ''हमारे देश में राष्ट्रीय आत्मसम्मान से जुड़े मुद्दों पर राजनीति होती रही और सोमनाथ मंदिर इसका प्रमुख उदाहरण है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति को बढ़ावा दे रहीं ताकतें आज भी देश में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा, ''हमने राम मंदिर के निर्माण के दौरान भी यही चीज देखी थी कि किस तरह इसका विरोध किया गया। हमें ऐसी मानसिकता के खिलाफ सतर्क रहना चाहिए और इस तरह की संकीर्ण राजनीति को पीछे छोड़ देना चाहिए।''

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प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमें विरासत और धरोहर दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की अनदेखी ने दरअसल हमारी प्रगति को बाधित ही किया है।'' इससे पहले प्रधानमंत्री ने सोमनाथ अमृत महोत्सव के तहत सोमनाथ मंदिर में महापूजा और अन्य अनुष्ठानों में भाग लिया। उन्होंने इस अवसर पर एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया। प्रधानमंत्री ने कहा, ''अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था... तो, 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था।'' उन्होंने कहा कि सोमनाथ अमृत-महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं है, यह अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा है मोदी ने कहा, ''लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया, वे सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे! बार-बार इस मंदिर को तोड़ा गया, ये बार-बार बनता रहा... हर बार उठ खड़ा होता रहा।'' भाषा वैभव मनीषा

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