Edited By Monika Jamwal,Updated: 13 Apr, 2020 06:17 PM

बैसाखी के दिन से किसान फसल की कटाई शुरू कर देते हैं लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण जम्मू के कई क्षेत्रों में कटाई शुरू नहीं हो पाई।
जम्मू (कमल) : बैसाखी के दिन से किसान फसल की कटाई शुरू कर देते हैं लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण जम्मू के कई क्षेत्रों में कटाई शुरू नहीं हो पाई। श्रमिकों की कमी और किसानों में कोरोना का भय का असर साफ देखा गया। नगरोटा क्षेत्र के चंद किसानों ने गेहूं की कटाई तो शुरू कर लेकिन अकेले अपने दम पर। महामारी ने बैसाखी पर्व के उल्लास को फीका कर दिया। कोरोना वायरस के चलते नगरोटा में वर्षों से चली आ रही बैसाखी की परम्परा भी नहीं निभाई जा सकी। नगरोटा और आसपास क्षेत्र के किसान इस दिन सामूहिक रूप से तवी नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना के बाद फसल की कटाई शुरू किया करते थे। हर वर्ष तवी नदी के किनारे खूब रौनक होती थी। सभी किसान अपने परिवार के साथ आते और स्नान करने के बाद डोगरी परम्परा के अनुसार खेतों में कटाई शुरू किया करते थे।
इस बार तवी नदी के किनारे एक भी आदमी नजर नहीं आया। खेतों में इक्का-दुक्का किसान फसल काटते दिखे। कोरोना वायरस के कारण पूरे कंडी इलाके के किसान सहमा-सहमा नजर आ रहा है। इस बार किसानों को फसल की कटाई के लिए प्रवासी श्रमिक उपलब्ध नहीं हो पाए। कुछ श्रमिक भले ही मौजूद हो लेकिन वे फसल की कटाई काम करनें से कतरा रहे हैं। हर किसी व्यक्ति को अपना और अपने परिवार की चिंता है। किसानों को चिंता सताने लगी है कि अगर समय पर राज्य प्रशासन ने कटाई के लिए मदद नहीं की अथवा कोई युक्ति नहीं निकाली तो मेहनत से उगाई गई फसल यूं ही बर्बाद हो जाएगी।

लॉकडाउन के कारण भी किसान बाहर निकलने से गुरेज कर रहे हैं। प्रशासन की पाबंदियों और घरों में रहने के फरमान का बखूबी पालन कर रहे है। अधिकतर किसानों को ज्ञात नहीं कि केंद्र सरकार के गृहमंत्रालय और केंद्रीय कृषि मामलों के मंत्रालय ने कृषि कार्यों के लिए छूट दी है। किसानों को शायद इस बार फसल कटाई के लिए सभी प्रकार के संसाधन उपलब्ध नहीं हो पाए लेकिन उन्हें कटाई करनी ही होगी। इसके लिए वे सामाजिक दूरियों को बनाकर काम कर सकते हैं। साफ-सफाई का उचित पालन करने और सरकार के सभी एहतियाती तौर पर जारी गाइडलाइन का पालन कर गेंहू की कटाई कर सकते हैं।