होर्मुज पार करने के लिए बाकी देश दे रहे 20 लाख डॉलर, क्या भारत से भी वसूला जा रहा पैसा?

Edited By Updated: 10 Apr, 2026 05:49 PM

other countries are paying 2 million to cross the strait of hormuz

अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस बीच ईरान द्वारा कुछ जहाजों से भारी ट्रांजिट शुल्क वसूलने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा...

नेशनल डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है। इस बीच ईरान द्वारा कुछ जहाजों से भारी ट्रांजिट शुल्क वसूलने की खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चिंता पैदा कर दी है।

2 मिलियन डॉलर तक की वसूली का दावा

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य अलाएद्दीन बोरौजेर्दी ने सरकारी प्रसारक IRIB को बताया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कुछ जहाजों से करीब 20 लाख डॉलर (2 मिलियन डॉलर) तक का ट्रांजिट शुल्क लिया जा रहा है। उनके अनुसार, यह कदम ईरान की सामरिक ताकत को दर्शाता है। गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए हमलों के बाद यह अहम समुद्री मार्ग तेल और गैस टैंकरों के लिए काफी हद तक प्रभावित हुआ था।

भारत का रुख साफ, सुरक्षित आवागमन पर जोर

भारत ने इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन का समर्थन करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि टोल वसूली की खबरें भारत के संज्ञान में हैं, लेकिन इस संबंध में भारत और ईरान के बीच कोई औपचारिक बातचीत नहीं हुई है।

क्या भारत से भी वसूला गया शुल्क?

सीजफायर से पहले भी ईरान द्वारा शुल्क वसूली की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, भारत सरकार ने साफ किया है कि उसने अपने जहाजों के गुजरने के लिए ईरान को किसी भी प्रकार का ट्रांजिट शुल्क नहीं दिया है। ईरान ने भारत को मित्र देश मानते हुए इस मार्ग से आवागमन की अनुमति दी हुई है।

भविष्य पर नजर, 8 भारतीय टैंकर गुजर चुके

रणधीर जायसवाल ने 9 अप्रैल को कहा कि यदि भविष्य में ऐसी कोई स्थिति बनती है, तो उस समय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल भारत बिना किसी बाधा के सुरक्षित शिपिंग की मांग जारी रखेगा। जानकारी के मुताबिक, इस मार्ग से अब तक भारतीय ध्वज वाले 8 एलपीजी टैंकर गुजर चुके हैं।

तेल आपूर्ति पर भारत की निर्भरता बनी चिंता

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी हद तक निर्भर है, जहां से करीब 90% तक तेल और गैस का आयात होता है। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डाल सकता है।

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