15 साल पुरानी गाड़ी रखना पड़ेगा महंगा, अब देना होगा भारी टैक्स, इस राज्य सरकार ने लागू किया नया नियम

Edited By Updated: 10 Apr, 2026 07:29 PM

owning a 15 year old vehicle will become expensive

महाराष्ट्र सरकार ने वाहनों के टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लागू कर दिया है, जो 7 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है। नए नियम के तहत 15 साल पुरानी गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे वाहन मालिकों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है।

नेशनल डेस्क : महाराष्ट्र सरकार ने वाहनों के टैक्स को लेकर बड़ा फैसला लागू कर दिया है, जो 7 अप्रैल 2026 से प्रभावी हो चुका है। नए नियम के तहत 15 साल पुरानी गाड़ियों पर ग्रीन टैक्स देना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे वाहन मालिकों की जेब पर सीधा असर पड़ने वाला है।

15 साल के बाद हर 5 साल में देना होगा टैक्स

सरकार के नए प्रावधान के अनुसार, जैसे ही कोई वाहन 15 साल पुराना होता है, उस पर ग्रीन टैक्स लागू हो जाएगा। यह टैक्स एक बार नहीं बल्कि हर पांच साल के लिए एकमुश्त देना होगा। यानी पुरानी गाड़ी रखना अब पहले से ज्यादा महंगा साबित होगा। सरकार का कहना है कि इस कदम से सड़कों पर प्रदूषण फैलाने वाले पुराने वाहनों की संख्या कम होगी।

BS-IV और पुरानी गाड़ियों पर ज्यादा असर

इस नियम का सबसे ज्यादा प्रभाव BS-IV और उससे पुरानी गाड़ियों के मालिकों पर पड़ेगा। इन वाहनों पर BS-VI मॉडल की तुलना में लगभग दोगुना टैक्स लगाया गया है। सरकार ने वाहनों को दो श्रेणियों-BS-VI और BS-IV (या उससे पुराने)- में बांटा है, ताकि नई तकनीक वाली कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को बढ़ावा मिल सके।

नई टैक्स दरें भी हुईं तय

सरकार ने अलग-अलग वाहनों के लिए नई ग्रीन टैक्स दरें निर्धारित की हैं। दोपहिया वाहनों के लिए BS-VI मॉडल पर 2,000 रुपये, जबकि BS-IV और पुरानी गाड़ियों पर 4,000 रुपये टैक्स देना होगा। पेट्रोल कारों पर BS-VI के लिए 3,000 रुपये और पुरानी गाड़ियों पर 6,000 रुपये तय किए गए हैं। वहीं, डीजल वाहनों के लिए BS-VI पर 3,500 रुपये और पुराने मॉडल पर 7,000 रुपये टैक्स देना होगा।

क्रेन और भारी मशीनों को राहत

जहां आम वाहन मालिकों के लिए नियम सख्त किए गए हैं, वहीं कंस्ट्रक्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को राहत भी दी गई है। क्रेन और भारी मशीनों के लिए ग्रीन टैक्स की अधिकतम सीमा 30 लाख रुपये तय की गई है, जिससे बड़े प्रोजेक्ट्स की लागत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।

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