CPEC को लेकर टेंशन में चीन, ग्वादर बंदरगाह के लिए पाक को किया आगाह

Edited By Updated: 09 Sep, 2019 01:47 PM

pak china gwadar port has run into rough weather

चीन द्वारा निर्मित और प्रबंधित पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट अब बहुत खराब हालात से जूझ रहा है। वहां पर जहाज पर माल चढ़ाने वाले से लेकर पोर्ट तक की कमी देखने को मिल रही है

इस्लामाबाद: चीन द्वारा निर्मित और प्रबंधित पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट अब बहुत खराब हालात से जूझ रहा है। वहां पर जहाज पर माल चढ़ाने वाले से लेकर पोर्ट तक की कमी देखने को मिल रही है। ग्वादर पोर्ट की ख़राब स्थिति और निर्माण कार्यों में हो रही देरी को देखते हुए चीन की COSCO शिपिंग कंपनी ने कराची और ग्वादर के बीच अपनी कंटेनर लाइनर सेवाओं को समाप्त कर दिया है। चीन ने पाकिस्तान को आगाह किया है और स्पष्ट कर दिया है कि ग्वादर चीन-पाक आर्थिक गलियारा ( CPEC ) का ताज है और पोर्ट की ख़राब व्यवस्था चीन के साथ उनके संबंधों को ख़राब कर सकता है।

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COSCO शिपिंग कंपनी ग्वादर पोर्ट पर बंद की सेवाएं
चीन की COSCO शिपिंग कंपनी ने ग्वादर पोर्ट के काम काज में अक्षमता, स्वदेशी शिपिंग कोस्ट में अनाप-शनाप खर्च और कराची पोर्ट द्वारा आवाजाही के लिए भेजे जाने वाले सामानों की अस्वीकारिता की वजहों से अपनी सेवाएं व जहाजों की यहां आवाजाही बंद कर दी है। COSCO ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान की अपर्याप्त नीतियां और उपायों की वजह से उन्होंने सेवा हटाने का फ़ैसला किया है क्योंकि इससे बाज़ार प्रभावित हो रहा था। पोर्ट ऑपरेटर ग्वादर इंटरनेश्नल टर्मिनल लिमिटेड, COPHC (चाइना ओवरसीज़ पोर्ट होल्डिंग कॉर्पोरेशन) ने भी इस हालात पर दुख ज़ाहिर किया है।

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COPHC और चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग्स लि. ने पाकिस्तान अधिकारियों के सामने स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान पोर्ट पर नया लाइनर सेवा शुरु करना उनके लिए असंभव सा होगा। बता दें कि कराची-ग्वादर सेवा ने ग्वादर पोर्ट पर पहली कंटेनर लाइनर सेवा मार्च 2018 में शुरू किया था। इस सेवा का मुख्य उद्देशय पाकिस्तान के सभी समुद्री पोर्ट के ज़रिए समुद्री व्यापार बढ़ाना है। ग्वादर कंटेनर सर्विस का वृहत तौर पर CPEC से संबंधित निर्माणाधीन सामान, मशीनरी और दूसरे कार्गो लाने ले जाने में प्रयोग किया जाता है।
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भारत के लिए ग्वादर पोर्ट के मायने
दरअसल चीन समुद्र में तीनों तरफ से भारत को घेरने की रणनीति बना रहा है।  ग्वादर ईरान से लगा हुआ है जो कि भारत को कच्चे तेल का निर्यात करने वाला प्रमुख देश है। ग्वादर पर नियंत्रण बनाते ही चीन ईरान से भारत आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति में जब चाहे अड़ंगे डाल सकता है। चीन ने इस बंदरगाह बनाने के लिए 75 फीसदी यानी 25 करोड़ डॉलर लगाए हैं। समझौते के अनुसार यह बंदरगाह पाकिस्तान की ही संपत्ति रहेगी लेकिन चीन की कंपनी इस बंदरगाह से होने वाले कामकाज के लाभ की हिस्सेदार रहेगी। चाइना ओवरसीज पोर्ट होल्डिंग्स लि. ने बलूचिस्तान प्रांत में स्थित ग्वादर बंदरगाह का नियंत्रण अपने हाथ में लिया था।

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क्या है चीन-पाक आर्थिक गलियारा
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा एक बहुत बड़ी वाणिज्यिक परियोजना है, जिसका उद्देश्य दक्षिण-पश्चिमी पाकिस्तान से चीन के उत्तर-पश्चिमी स्वायत्त क्षेत्र शिंजियांग तक ग्वादर बंदरगाह, रेलवे और हाइवे के माध्यम से तेल और गैस की कम समय में वितरण करना है। आर्थिक गलियारा चीन-पाक संबंधों में केंद्रीय महत्व रखता है। गलियारा ग्वादर से काशगर तक लगभग 2442 किलोमीटर लंबा है। इस योजना पर 46 बिलियन डॉलर लागत का अनुमान किया गया है। यह गलियारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान होते हुए जाएगा। विविध सूचनाओं के अनुसार ग्वादर बंदरगाह को इस तरह से विकसित किया जा रहा है, ताकि वह 19 मिलियन टन कच्चे तेल को चीन तक सीधे भेजने में सक्षम होगा। 

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