जम्मू-पठानकोट रिंग रोड के लिए अधिगृहीत जमीन का मार्किट रेट के हिसाब से मिले मुआवजा : मंजीत सिंह

Edited By Monika Jamwal,Updated: 25 Mar, 2022 06:47 PM

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अपनी पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष (जम्मू) और पूर्व मंत्री सरदार मंजीत सिंह ने आज मांग की कि जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के चलते प्रभावित हुए डेरा गंडोत्राँ के निवासियों के लिए निर्धारित मुआवजे की राशि को बाजार दर के अनुसार बढ़ाया जाए।

साम्बा : अपनी पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष (जम्मू) और पूर्व मंत्री सरदार मंजीत सिंह ने आज मांग की कि जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के चलते प्रभावित हुए डेरा गंडोत्राँ के निवासियों के लिए निर्धारित मुआवजे की राशि को बाजार दर के अनुसार बढ़ाया जाए। 


    मंजीत सिंह ने जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग के समीप स्थित गांव डेरा गंडोत्राँ में लोगों के साथ बैठक की और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि यह लोग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग और रिंग रोड को चौड़ा करने के लिए उनकी भूमि के अधिग्रहण से परेशान हैं क्योंकि यह सडक़ें इन लोगों से उनकी कृषि भूमि छीन लेंगी और कई परिवारों को भूमिहीन कर देंगी।

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    मंजीत ने कहा कि अधिकारी उन किसानों को वैकल्पिक जमीन नहीं दे रहे हैं, जिस भूमि का उपयोग राजमार्ग विस्तार या साम्बा जिले में रिंग रोड परियोजना में किया जा रहा है। यह परिवार को उनकी जायज मांगों के प्रति अधिकारियों द्वारा अपनाए गए रवैये से चिंतित हैं। मंजीत ने लोगों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों को संबंधित अधिकारियों के समक्ष पेश किया जाएगा।


    उन्होंने कहा कि लोगों ने किसानों को प्रति कनाल दिए जा रहे मुआवजे को बढ़ाने की मांग की है। डेरा गंडोत्राँ के ग्रामीणों को प्रति कनाल 20 लाख रुपये की पेशकश की जा रही है, जो आसपास के अन्य गांवों की तुलना में बहुत कम राशि है, जिन्हें 30 से 35 लाख रुपये प्रति कनाल दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र एक व्यावसायिक केंद्र है और अधिकारियों को लोगों के भविष्य के साथ समझौता नहीं करना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है लेकिन यह लोगों की पीड़ा अथवा नुक्सान की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोग अनुमानित विकास से परेशान हैं जो सरकार के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जो हर वर्ग के लिए टिकाऊ हो, जिससे पारिस्थितिकी को कोई नुकसान न हो और स्थानीय आबादी का भी विस्थापन न हो। उन्होंने यह भी कहा कि अधिकारियों को लोगों की मांगों को गंभीरता से लेना चाहिए।
 

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