Edited By Radhika,Updated: 06 Apr, 2026 11:27 AM

आम आदमी की रसोई से लेकर परिवहन के खर्च तक, पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर किसी के बजट को प्रभावित करती हैं। साथ ही यह सवाल उठता है कि Base Price कम होने के बावजूद हमें ईंधन इतना महंगा क्यों मिलता है? इसका मुख्य कारण वर्तमान टैक्स ढांचा है। आइए समझते...
GST on Petrol and Diesel: आम आदमी की रसोई से लेकर परिवहन के खर्च तक, पेट्रोल और डीजल की कीमतें हर किसी के बजट को प्रभावित करती हैं। साथ ही यह सवाल उठता है कि Base Price कम होने के बावजूद हमें ईंधन इतना महंगा क्यों मिलता है? इसका मुख्य कारण वर्तमान टैक्स ढांचा है। आइए समझते हैं कि यदि ईंधन को GST के दायरे में लाया जाए, तो आपकी जेब पर इसका क्या असर पड़ेगा।
मौजूदा टैक्स व्यवस्था vs GST
वर्तमान में पेट्रोल-डीजल पर 'टैक्स के ऊपर टैक्स' लगता है। केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी वसूलती है, जिसके ऊपर राज्य सरकारें अपना VAT लगाती हैं। उदाहरण के तौर पर दिल्ली में पेट्रोल की बेस कीमत करीब ₹55-56 है, लेकिन टैक्स और डीलर कमीशन जुड़ने के बाद यह ₹95 के पार चली जाती है। यानी हम वास्तविक कीमत का लगभग 40-45% हिस्सा केवल टैक्स के रूप में चुकाते हैं।
GST लागू होने पर क्या बदल जाएगा?
अगर सरकार पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाती है, तो कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है। यहाँ दो Scenarios दिए गए हैं:
1. यदि 12% GST लागू हुआ
यदि ईंधन पर न्यूनतम प्रभावी GST दर 12% रखी जाती है, तो गणित कुछ ऐसा होगा:
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टैक्स: करीब ₹6 से ₹7 प्रति लीटर।
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अनुमानित कीमत: डीलर कमीशन के साथ पेट्रोल ₹68-70 और डीजल ₹67-68 प्रति लीटर तक आ सकता है।
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राहत: मौजूदा कीमतों से लगभग ₹20-25 की सीधी बचत।
2. यदि 28% GST लागू हुआ
अगर सरकार सबसे ऊंचे स्लैब यानी 28% पर टैक्स लगाती है, तब भी कीमतें कम होंगी:
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टैक्स: करीब ₹15 से ₹16 प्रति लीटर।
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अनुमानित कीमत: पेट्रोल ₹75-80 और डीजल ₹72-75 के आसपास रह सकता है।
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राहत: यह वर्तमान कीमतों की तुलना में फिर भी सस्ती होगी।
आखिर देरी क्यों? राज्यों की चिंता और राजस्व का सवाल
GST लागू करने में सबसे बड़ी बाधा राजस्व का नुकसान है। VAT राज्यों की कमाई का एक बड़ा जरिया है। यदि पेट्रोल-डीजल GST में आता है, तो राज्यों को मिलने वाला सीधा टैक्स कम हो जाएगा, जिसकी भरपाई करना एक बड़ी चुनौती है।