Edited By Ramkesh,Updated: 18 Apr, 2026 02:41 PM

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां चुनाव प्रचार के लिए आने का कार्यक्रम है और इस बार का उनका यह दौरा विशेष रूप से आदिवासी मतदाताओं पर केंद्रित हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को राज्य भर...
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रथम चरण के मतदान से पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यहां चुनाव प्रचार के लिए आने का कार्यक्रम है और इस बार का उनका यह दौरा विशेष रूप से आदिवासी मतदाताओं पर केंद्रित हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को राज्य भर में चार जनसभाओं को संबोधित करेंगे, जो मुख्य रूप से राढ़ बंगाल इलाके के हैं।
एक ही दिन में होगी चार रैलियां
उनके कार्यक्रम में बिष्णुपुर, पुरुलिया, झाड़ग्राम और मेदिनीपुर की बैठकें शामिल हैं। बंगाल में एक ही दिन में चार रैलियां करना उनके सामान्य चुनावी पैटर्न से थोड़ा अलग है। तय कार्यक्रम के अनुसार, प्रधानमंत्री शनिवार रात अंडाल हवाई अड्डे पर पहुंचेंगे और दुर्गापुर में रुकेंगे। वह वहां से बांकुड़ा के लिए उड़ान भरेंगे और रविवार सुबह करीब 11 बजे बरजोरा में अपनी पहली रैली को संबोधित करेंगे।
मेदिनीपुर में करेंगे चौथी रैली
इसके बाद वह पुरुलिया जायेंगे, जहां दोपहर 12:45 बजे बलरामपुर विधानसभा क्षेत्र में एक रैली को संबोधित करने का उनका कार्यक्रम है। तीसरी रैली दोपहर 2:45 बजे झाड़ग्राम के टाउन क्षेत्र के पास निर्धारित है, जिसके बाद मेदिनीपुर में दिन की चौथी और अंतिम जनसभा होगी। इसके अलावा 23 अप्रैल को प्रधानमंत्री मोदी के हावड़ा स्थित बेलूर मठ जाने की उम्मीद है, जहां से वह सालकिया तक रोड शो करेंगे।
उसी दिन उनका कृष्णनगर में भी एक रैली को संबोधित करने का कार्यक्रम है। पहले चरण के मतदान में अब केवल पांच दिन शेष हैं, ऐसे में राज्य में चुनाव प्रचार काफी तेज हो गया है। प्रधानमंत्री भारतीय जनता पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं के साथ 2026 के विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के आक्रामक प्रचार के हिस्से के रूप में बार-बार बंगाल का दौरा कर रहे हैं।
भाजपा सभी 294 विधानसभा क्षेत्रों में प्रधानमंत्री मोदी को अपने अभियान के मुख्य चेहरे के रूप में पेश कर रही है, साथ ही‘सोनार बांग्ला'बनाने के अपने आह्वान को दोहरा रही है। प्रधानमंत्री के इस आगामी दौरे को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जंगलमहल क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के बीच समर्थन मजबूत करने के रणनीतिक प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।