'ये सब कलयुग के संकेत हैं...', प्रेमानंद जी महाराज ने चेताया, बोले- अभी ये दुख सहने बाकी हैं

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 05:38 PM

premanand maharaj warned saying we still have to endure these sufferings

प्रेमानंद महाराज के अनुसार, कलयुग में स्वार्थ और लालच तेजी से फैल रहे हैं, जिससे रिश्तों में प्यार और भरोसा धीरे-धीरे कम हो रहा है। माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी बढ़ रही है और भाई-बहन के रिश्ते कमजोर हो रहे हैं। लोग केवल अपने फायदे और सुख में...

नेशनल डेस्क : कलयुग में स्वार्थ और बुराई इतनी तेजी से फैल रही है कि लोग अपने निजी लाभ और लालच में पूरी तरह डूब गए हैं। इसके चलते रिश्तों में प्यार और विश्वास खत्म हो रहा है। माता-पिता और बच्चों के बीच दूरी बढ़ गई है, भाई-बहन के रिश्ते पहले जैसी मजबूती नहीं दिखा रहे। लोग एक-दूसरे पर भरोसा करने में असमर्थ हैं और हर कोई केवल अपनी सुख-समृद्धि में ही व्यस्त है। साथ ही, प्रकृति भी अब पहले जैसी स्वच्छ और संतुलित नहीं रही।

भक्त ने क्या सवाल पूछा था?

इसी बारे में एक भक्त ने प्रेमानंद महाराज से पूछा, 'महाराज, क्या सच में कलयुग इतना बुरा होगा कि अपनों पर भरोसा नहीं रहेगा? क्या बच्चों और रिश्तेदारों में विश्वास करना मुश्किल हो जाएगा?'

महाराज ने क्या उत्तर दिया?

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि कलयुग का असर धीरे-धीरे हर जगह दिखाई देने लगा है। आज जो दुर्लभ लगता है, भविष्य में वही सामान्य हो सकता है। पिता द्वारा बच्चों का शोषण, अपनों से दुख मिलना, और रिश्तों में विश्वास का टूटना। ये सब कलयुग के संकेत हैं। समय के साथ हर संबंध, हर रिश्ता और समाज का हर स्तर इस बुराई से प्रभावित होगा।

रिश्तों और प्रकृति में होगा बदलाव

महाराज ने आगे कहा कि भविष्य में बहन और बेटी के रिश्तों में भी फर्क मिट जाएगा। लोग अपने स्वार्थ और लालच में इतने डूबेंगे कि रिश्तों की मर्यादा समाप्त हो जाएगी। इंसान केवल अपने लाभ और सुख के लिए कार्य करेगा। प्रकृति भी इस समय बदलाव की मार झेल रही है। नदियों का जल अब पहले जैसी शुद्धता और जीवनदायिनी नहीं रहा। वृंदावन जैसी पवित्र जगहों पर परिक्रमा करने के बाद प्यास लगती है और बोतलबंद पानी खरीदना पड़ता है। कभी गंगा का जल अमृत समान माना जाता था, आज उसका स्वाद और शुद्धता खोती जा रही है।

बचाव करने के उपाय

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि इस कठिन समय में केवल भगवान का नाम जपना ही हमें पवित्र और सुरक्षित रख सकता है। नाम-स्मरण से मन शांत और आत्मा मजबूत होती है। यह उपाय कलयुग की बुराइयों, पापों और लालच से रक्षा करता है। महाराज ने यह भी बताया कि नाम जपने से न केवल व्यक्ति का मन और शरीर शांत रहता है, बल्कि वह समाज और परिवार में अपने कर्तव्यों को निभाने में सक्षम बनता है। नाम जपना, ध्यान करना और भगवान का स्मरण करना आज के समय में सबसे बड़ा शस्त्र है, जो हमें कलयुग की अंधकारमय परिस्थितियों से उज्ज्वल मार्ग दिखाता है।

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