Edited By Sahil Kumar,Updated: 06 Mar, 2026 07:29 PM

पश्चिम एशिया में ईरान द्वारा कतर के प्रमुख गैस प्लांटों पर हमले के बाद कतर ने एशियाई देशों को LNG सप्लाई अस्थायी रूप से रोक दी है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में 40-50% तक तेजी आई है। भारत अपनी जरूरत का करीब 50% गैस कतर से आयात करता...
नेशनल डेस्कः पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अब ऊर्जा क्षेत्र तक पहुंच गया है और इससे वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ गई है। हालिया घटनाक्रम में ईरान द्वारा कतर के प्रमुख गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद कतर ने एशियाई देशों को भेजी जाने वाली अपनी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति अस्थायी रूप से रोक दी है। इस फैसले से एशिया के कई बड़े ऊर्जा आयातक देशों पर असर पड़ने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई है।
कतर के गैस ठिकानों पर हमला
सूत्रों के अनुसार, ईरान ने कतर के उन गैस क्षेत्रों और प्रोसेसिंग सुविधाओं को निशाना बनाया है जो दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यात केंद्रों में गिने जाते हैं। इन हमलों में ऊर्जा ढांचे को नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। सुरक्षा और तकनीकी समीक्षा के मद्देनज़र कतर ने चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया सहित कई एशियाई देशों के लिए LNG शिपमेंट को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
एशियाई बाजार पर असर
कतर वैश्विक स्तर पर LNG का एक बड़ा उत्पादक है और उसका प्रमुख बाजार एशिया है। आपूर्ति रुकने से कई जहाज बंदरगाहों पर ही रुक गए हैं, जिससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई है। इस घटनाक्रम के तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में लगभग 40 से 50 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई है।
भारत के लिए संभावित प्रभाव
- भारत अपनी LNG जरूरतों का लगभग 45 से 50 प्रतिशत हिस्सा कतर से आयात करता है। ऐसे में कतर की आपूर्ति रुकने से देश पर कई स्तरों पर प्रभाव पड़ सकता है।
- घरेलू रसोई गैस (LPG) की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है।
- गैस महंगी होने से बिजली उत्पादन और उर्वरक उद्योग की लागत बढ़ सकती है।
- CNG के दाम बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
भारत के विकल्प क्या हैं
स्थिति को देखते हुए भारत सरकार ने उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई है। कतर से आपूर्ति में कमी की भरपाई के लिए भारत अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसके तहत रूस और अमेरिका से अतिरिक्त गैस कार्गो मंगाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए गैस के रणनीतिक भंडार को बढ़ाने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान और कतर के बीच तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो एशिया में ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर दबाव बन सकता है। ऐसी स्थिति में कुछ देशों को ऊर्जा खपत पर नियंत्रण जैसे कदम भी उठाने पड़ सकते हैं। पश्चिम एशिया का यह नया संकट वैश्विक ऊर्जा बाजार और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता दिखाई दे रहा है।