Edited By Radhika,Updated: 05 Mar, 2026 01:21 PM

श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत 'IRIS Dena' को डुबोए जाने के बाद भारत में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी पर सवाल उठाते हुए उन्हें जमकर...
नेशनल डेस्क : श्रीलंका के तट के पास अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा ईरानी युद्धपोत 'IRIS Dena' को डुबोए जाने के बाद भारत में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खामोशी पर सवाल उठाते हुए उन्हें जमकर घेरा है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष अब भारत के पिछले दरवाजे (Backyard) तक पहुंच गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब देश को एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत है, तब प्रधानमंत्री ने भारत की रणनीतिक स्वायत्तता का सरेंडर कर दिया है। राहुल ने आगाह किया कि भारत की 40% तेल आपूर्ति और गैस (LPG/LNG) का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है, जिस पर अब सीधा खतरा मंडरा रहा है।
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मेहमान नवाजी और विश्वासघात का सवाल
पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इस घटना पर भारत की संवेदनशीलता का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि 'IRIS Dena' विशाखापत्तनम में आयोजित International Fleet Review 2026 और MILAN 2026 अभ्यास में भारत के विशेष निमंत्रण पर शामिल होने आया था। प्रोटोकॉल के मुताबिक, अभ्यास में शामिल जहाज गोला-बारूद नहीं ले जाते। सिब्बल के अनुसार अमेरिकी नौसेना ने आखिरी समय में अभ्यास से नाम वापस ले लिया था, जो संभवतः इस हमले की पूर्व-योजना का हिस्सा था। उन्होंने कहा कि ईरानी नौसैनिकों ने हमारे राष्ट्रपति को सलामी दी थी, ऐसे में उनके प्रति संवेदना व्यक्त करना भारत की नैतिक जिम्मेदारी है।

ईरान ने अमेरिका को दी कड़ी चेतावनी
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि निहत्थे जहाज पर बिना चेतावनी के हमला एक अत्याचार है और वाशिंगटन को अपने इस कदम पर भारी पछतावा होगा। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने बुधवार को पुष्टि की थी कि एक अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरानी जहाज को टॉरपीडो से निशाना बनाया है।
बचाव कार्य और नुकसान
श्रीलंकाई नौसेना के अनुसार, जहाज पर करीब 180 लोग सवार थे। अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं और 32 लोगों को बचाकर गॉल (Galle) के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।