Edited By Radhika,Updated: 16 Feb, 2026 01:25 PM

वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते दबदबे और अमेरिका-ब्रिटेन के साथ नए व्यापार समझौतों के बाद भी भारतीय मुद्रा 'रुपया' अपनी मजबूती बरकरार रखने में संघर्ष कर रही है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया 90.71 प्रति डॉलर के स्तर पर लुढ़क गया।
Rupee vs Dollar: वैश्विक स्तर पर भारत के बढ़ते दबदबे और अमेरिका-ब्रिटेन के साथ नए व्यापार समझौतों के बाद भी भारतीय मुद्रा 'रुपया' अपनी मजबूती बरकरार रखने में संघर्ष कर रही है। सोमवार को शुरुआती कारोबार के दौरान रुपया 90.71 प्रति डॉलर के स्तर पर लुढ़क गया।
आखिर क्यों टूट रही है Indian Currency?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, रुपये पर दबाव के पीछे चार प्रमुख कारण हैं:
1. डॉलर की मजबूती: दुनिया की प्रमुख 6 मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला 'डॉलर इंडेक्स' 96.93 पर जा पहुंचा है। जब डॉलर मजबूत होता है, तो रुपये जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं कमजोर पड़ने लगती हैं।
2. विदेशी निवेशकों की बेरुखी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले सत्र में भारतीय शेयर बाजार से 7,395 करोड़ रुपये से अधिक की बड़ी निकासी की है। बाजार से पैसा बाहर जाने का सीधा असर मुद्रा की वैल्यू पर पड़ता है।
3. कच्चे तेल का 'करंट': भारत अपनी तेल की जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्रेंट क्रूड के दाम 67.78 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने से भारत का आयात बिल बढ़ गया है, जो रुपये के लिए निगेटिव संकेत है।
4. विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट: RBI के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 6.711 अरब डॉलर घटकर 717.064 अरब डॉलर रह गया है। भंडार में यह कमी बाजार में निवेशकों के भरोसे को प्रभावित कर रही है।

सेंसेक्स और निफ्टी का हाल
शेयर बाजार में भी सोमवार को सुस्ती का माहौल रहा। सेंसेक्स 82,555 के स्तर के पास कारोबार करता दिखा, वहीं निफ्टी 25,459 के आसपास फिसल गया। निवेशकों की नजर अब आज जारी होने वाले Trade Balance के आंकड़ों पर टिकी है, जो भविष्य की दिशा तय करेंगे।