Edited By Ramanjot,Updated: 03 Nov, 2026 12:37 PM

महापात्र को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2024 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2017 में नयी दिल्ली स्थित एम्स में ओडिशा के रहने वाले, सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों को 16 घंटे लंबे ऑपरेशन के बाद...
भुवनेश्वर: प्रख्यात न्यूरोसर्जन एवं पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ. अशोक कुमार महापात्र का दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में सोमवार रात निधन हो गया। पारिवारिक सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। वह 74 वर्ष के थे। सूत्रों ने बताया कि महापात्र का एम्स में तंत्रिका तंत्र संबंधी बीमारियों का इलाज चल रहा था। उनके परिवार में पत्नी और एक बेटी हैं।
सीएम माझी और नवीन पटनायक ने जताया शोक
ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने मंगलवार को प्रख्यात न्यूरोसर्जन के निधन पर शोक व्यक्त किया। माझी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''प्रसिद्ध चिकित्सा विशेषज्ञ एवं पद्मश्री से सम्मानित प्रोफेसर (डॉ.) अशोक कुमार महापात्र के निधन की खबर सुनकर मुझे गहरा दुख हुआ है। देश के एक प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन और चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में एक अग्रणी व्यक्ति के रूप में उन्होंने ओडिशा और पूरे देश का गौरव बढ़ाते हुए स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र को समृद्ध किया। चिकित्सा सेवाओं और अनुसंधान में उनका उल्लेखनीय योगदान हमेशा याद रखा जाएगा।''
बीजद अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा, ''महापात्र ने चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी है। चाहे ओडिशा में एम्स की स्थापना करना हो या लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना हो, उन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। यह पूरे राज्य के साथ-साथ भारत के लिए भी एक अपूर्णनीय क्षति है।'' उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ''दुख की इस घड़ी में शोक संतप्त परिवार के सदस्यों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए, मैं दिवंगत आत्मा की शाश्वत शांति के लिए प्रार्थना करता हूं।''
2024 में पद्मश्री पुरस्कार से हुए थे सम्मानित
महापात्र को चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए 2024 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने 2017 में नयी दिल्ली स्थित एम्स में ओडिशा के रहने वाले, सिर से जुड़े जुड़वां बच्चों को 16 घंटे लंबे ऑपरेशन के बाद सफलतापूर्वक अलग किया था। इस सर्जरी में जगा और कालिया, दोनों जुड़वा बच्चों को अलग-अलग किया गया था। मीडिया में यह सर्जरी खासी चर्चित रही थी। इसे भारत में अपनी तरह की पहली सर्जरी बताया गया था। महापात्र ने भुवनेश्वर में एम्स की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और उन्हें इसका पहला निदेशक नियुक्त किया गया था। महापात्र का पार्थिव शरीर मंगलवार को अंतिम संस्कार के लिए भुवनेश्वर लाया जाएगा।