Rinku Singh News: कंधे पर सिलेंडर ढोकर बेटे को बनाया ‘सिक्सर किंग’, रिंकू सिंह के करियर के 'Man of the Match' थे उनके पिता

Edited By Updated: 27 Feb, 2026 12:01 PM

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भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता, खानचंद सिंह, का निधन हो गया है। रिंकू के पिता ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में अंतिम सांस ली। बीते...

नेशनल डेस्क: भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे रिंकू सिंह के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता, खानचंद सिंह, का निधन हो गया है। रिंकू के पिता ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझते हुए उन्होंने ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में अंतिम सांस ली। बीते कुछ दिनों से रिंकू के पिता लीवर कैंसर के कारण वेंटिलेटर पर जीवन की जंग लड़ रहे थे। क्रिकेटर बनने से पहले रिंकू सिंह का जीवन काफी सादा था। उनके पिता सिलेंडर डिलीवरी का काम करते थे।

सिलेंडर ढोकर संवारा बेटे का भविष्य

अलीगढ़ के एक साधारण परिवार से आने वाले खानचंद सिंह की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उन्होंने वर्षों तक घरों में एलपीजी सिलेंडर पहुँचाने का काम किया ताकि उनके बच्चों की जरूरतें पूरी हो सकें। एक समय ऐसा था जब खानचंद सिंह महीने में बमुश्किल 7 से 8 हजार रुपये कमा पाते थे और परिवार पर 5 लाख रुपये का कर्ज भी था। लेकिन तंगहाली के बावजूद उन्होंने रिंकू के क्रिकेट प्रेम को दबने नहीं दिया।

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मार से लेकर समर्थन तक का सफर

रिंकू सिंह ने अपने करियर की शुरुआत में पिता की नाराजगी भी झेली। साल 2012 में क्रिकेट खेलने को लेकर उन्हें पिता से मार भी खानी पड़ी थी। हालांकि, उसी साल जब रिंकू ने एक टूर्नामेंट में इनाम के तौर पर बाइक जीती, तो पिता का नजरिया बदल गया। उसी बाइक का इस्तेमाल खानचंद सिंह ने बाद में सिलेंडर डिलिवरी के काम में भी किया। रिंकू के भाइयों ने भी परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ऑटो चलाने से लेकर कोचिंग संस्थान में काम करने तक की जिम्मेदारी निभाई।

सफलता के शिखर पर भी नहीं भूला फर्ज

आईपीएल में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के साथ जुड़ाव और फिर गुजरात टाइटंस के खिलाफ लगातार 5 छक्के लगाने के बाद रिंकू की किस्मत बदल गई। करोड़ों के अनुबंध मिलने के बाद रिंकू ने सबसे पहले अपने पिता का सपना पूरा किया। उन्होंने अलीगढ़ में करीब 3.5 करोड़ रुपये की एक आलीशान कोठी बनवाई और पिता को कावासाकी की महंगी बाइक भी उपहार में दी।

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रिंकू सिंह, जो वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का हिस्सा हैं, टी-20 विश्व कप के दौरान अपने बीमार पिता को देखने अस्पताल भी आए थे। खानचंद सिंह का जाना न केवल रिंकू के लिए बल्कि अलीगढ़ के उस संघर्ष के लिए भी एक बड़ी क्षति है, जिसने अभावों के बीच एक नायक को जन्म दिया।

 

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