Reasons Share Market Crash: सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम, इन 4 कारणों से क्रैश हुआ शेयर बाजार

Edited By Updated: 02 Mar, 2026 03:32 PM

these 4 reasons caused the stock market to crash

भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार, 2 मार्च को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बिकवाली इतनी तेज रही कि सेंसेक्स 1,600 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 500 अंकों से अधिक लुढ़ककर 24,700 के नीचे पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और...

बिजनेस डेस्कः भारतीय शेयर बाजारों में सोमवार, 2 मार्च को जोरदार गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान बिकवाली इतनी तेज रही कि सेंसेक्स 1,600 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी 500 अंकों से अधिक लुढ़ककर 24,700 के नीचे पहुंच गया। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया। मेटल सेक्टर को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर दबाव में रहे, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी करीब 0.8% तक गिरावट आई।

सेंसेक्स 1048.34 अंक यानी 1.29% टूटकर 80,238.85 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 312.95 अंक यानी 1.24% गिरकर 24,865.70 पर आ गया। इस गिरावट से निवेशकों को 9 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

 

गिरावट के चार बड़े कारण


1. पश्चिम एशिया में तनाव और तेल की कीमतों में उछाल

Israel और Iran के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। क्षेत्र में हालात बिगड़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। ब्रेंट क्रूड 7% से अधिक चढ़कर करीब 82 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो पिछले 14 महीनों का उच्च स्तर है।

इसके अलावा, Strait of Hormuz से समुद्री आवाजाही बाधित होने की आशंका ने सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस मार्ग से वैश्विक कच्चे तेल की लगभग 20% आपूर्ति और भारत के 40% से अधिक आयात गुजरते हैं। तेल महंगा होने से ऑयल मार्केटिंग, एविएशन, पेंट, टायर और केमिकल कंपनियों के शेयरों में दबाव बढ़ गया।

2. रुपया कमजोर, बॉन्ड यील्ड में तेजी

तनावपूर्ण माहौल में निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़े, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ। सरकारी बॉन्ड यील्ड में भी उछाल देखा गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार को उम्मीद है कि Reserve Bank of India रुपये को रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब जाने से रोकने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।

एशियाई बाजारों में भी दबाव दिखा और MSCI एशिया-पैसिफिक इंडेक्स में गिरावट दर्ज की गई।

3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 27 फरवरी को ₹7,536 करोड़ से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹12,292 करोड़ की खरीदारी कर कुछ हद तक गिरावट को थामने की कोशिश की, लेकिन बाजार पर दबाव बना रहा।

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार के अनुसार, मिडिल-ईस्ट संकट ने जोखिम लेने की क्षमता को कम कर दिया है और विदेशी निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपना सकते हैं।

4. India VIX में तेज उछाल

अस्थिरता मापने वाला India VIX 15% से अधिक उछलकर 15.78 पर पहुंच गया। यह संकेत देता है कि निवेशकों में घबराहट बढ़ी है और बाजार में उतार-चढ़ाव आगे भी जारी रह सकता है।

कुल मिलाकर, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और विदेशी बिकवाली ने मिलकर बाजार को जोरदार झटका दिया। आगे की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल पर निर्भर करेगी।

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