Edited By Tanuja,Updated: 02 Mar, 2026 03:16 PM

अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में ईरान में कम से कम 555 लोगों की मौत हो चुकी है। Iranian Red Crescent Society के अनुसार 131 शहर हमलों से प्रभावित हैं। राहत और बचाव अभियान जारी है, जबकि देशभर में लाखों स्वयंसेवक अलर्ट पर हैं।
International Desk: ईरान को निशाना बनाकर किए जा रहे अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में अब तक कम से कम 555 लोगों की मौत हो चुकी है। सऊदी अरब ने रास तानूरा तेल रिफाइनरी पर हुए ड्रोन हमले को नाकाम कर दिया। इस बीच अमेरिका ने दावा किया कि उसने ईरान के IRGC मुख्यालय को ध्वस्त कर दिया है। इजरायल ने भी तेहरान में सैन्य ठिकानों पर हमले किए। सोमवार को Iranian Red Crescent Society ने दी। संस्था के अनुसार, देश के 131 शहर इन हमलों की चपेट में आ चुके हैं। कई स्थानों पर रिहायशी इलाकों, सार्वजनिक इमारतों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
US Central Command (CENTCOM) ने कहा कि उसने ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के मुख्यालय को बड़े पैमाने पर हमले में नष्ट कर दिया। CENTCOM ने बयान में कहा कि “IRGC ने पिछले 47 वर्षों में 1,000 से अधिक अमेरिकियों की हत्या की। कल के बड़े हमले ने सांप का सिर कुचल दिया।” इजरायली सेना ने भी तेहरान सहित कई सैन्य कमांड सेंटरों पर हमले की पुष्टि की है। बयान के अनुसार, IRGC इंटेलिजेंस मुख्यालय और एयर फोर्स कमांड सेंटरों को गंभीर क्षति पहुंची है। ये संयुक्त अमेरिकी-इजरायली अभियान ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei की मौत के बाद और तेज हो गए हैं।
ईरान ने जवाब में इजरायल, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों, सऊदी राजधानी और दुबई की ओर मिसाइल व ड्रोन हमले किए। इस बीच ईरान ने 66 वर्षीय धर्मगुरु Alireza Arafi को तीन सदस्यीय अंतरिम नेतृत्व परिषद में नियुक्त किया है, जो नए सर्वोच्च नेता के चयन तक शासन देखेगी। रेड क्रिसेंट ने बताया कि उसका मानवीय मिशन बिना रुके काम कर रहा है। देशभर में राहत और बचाव दल तैनात हैं और एक लाख से अधिक आपातकर्मी हाई अलर्ट पर हैं। करीब 40 लाख स्वयंसेवकों का नेटवर्क जरूरत पड़ने पर सहायता और मनोवैज्ञानिक सहयोग देने के लिए तैयार रखा गया है। 131 शहरों तक फैले हमलों ने देश में मानवीय संकट की आशंका बढ़ा दी है। अस्पतालों पर दबाव बढ़ रहा है और विस्थापित लोगों की संख्या लगातार बढ़ सकती है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इन हमलों को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि संघर्ष का दायरा लगातार विस्तार ले रहा है।