आखिरी बार कब भारत आए थे खामेनेई? ईरान का सर्वोच्च नेता बनने से पहले इन 2 राज्यों का किया था दौरा

Edited By Updated: 02 Mar, 2026 04:40 PM

khamenei visited these two indian states before becoming iran supreme leader

अयातुल्ला अली खामेनेई ने सुप्रीम लीडर बनने से पहले 1980-81 में भारत का दौरा किया था। वे बेंगलुरु, अलीपुर और श्रीनगर गए, जहां उन्होंने धार्मिक सभाओं को संबोधित किया। 2012 में तेहरान में मनमोहन सिंह से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपनी भारत यात्रा को याद...

नेशनल डेस्क : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने 1989 में देश की कमान संभालने से पहले भारत की यात्रा की थी। यह दौरा 1980-81 के आसपास हुआ था, जब वे इस्लामिक रिपब्लिक के शुरुआती दौर में एक प्रमुख धर्मगुरु के रूप में उभर रहे थे। उस समय उनकी उम्र करीब 41 वर्ष थी।

कर्नाटक का दौरा

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी अभिलेखों और बाद में सामने आई सूचनाओं से पता चलता है कि अपनी भारत यात्रा के दौरान खामेनेई सबसे पहले बेंगलुरु पहुंचे थे। इसके बाद वे कर्नाटक की राजधानी से करीब 75 किलोमीटर दूर स्थित अलीपुर गए। अलीपुर में शिया मुस्लिम समुदाय की बड़ी आबादी है और इस क्षेत्र के ईरान के साथ लंबे समय से धार्मिक व शैक्षिक संबंध रहे हैं। उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर साझा तस्वीरों में 1981 के दौरान बेंगलुरु और अलीपुर में लोगों को उनका स्वागत करते हुए देखा जा सकता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने वहां ईरान के सहयोग से निर्मित एक अस्पताल का उद्घाटन भी किया था।

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कश्मीर यात्रा और श्रीनगर में भाषण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कश्मीर दौरे के दौरान खामेनेई ने श्रीनगर में एक जनसभा को संबोधित किया था। उस समय घाटी में सांप्रदायिक तनाव का माहौल था। उन्होंने एक सुन्नी मस्जिद में जुमे की नमाज अदा की और लगभग 15 मिनट तक लोगों को संबोधित किया। स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, उनके संबोधन के बाद शिया और सुन्नी समुदायों के बीच पहले से मौजूद दूरियां कुछ कम हुईं और दोनों समुदायों के लोग आपसी विश्वास के साथ एक-दूसरे की मस्जिदों में जाने लगे।

मनमोहन सिंह से बातचीत में भारत का जिक्र

लगभग तीस साल बाद, अगस्त 2012 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तेहरान पहुंचे, तब खामेनेई ने अपनी पुरानी भारत यात्रा को याद किया। उन्होंने महात्मा गांधी के स्वतंत्रता संग्राम की सराहना की और जवाहरलाल नेहरू को गुटनिरपेक्ष आंदोलन की प्रमुख शख्सियत बताया। साथ ही भारत की बहुधार्मिक परंपरा की प्रशंसा भी की।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि भारत में रहते हुए उन्होंने सिख समुदाय और उनके व्यवसायों को करीब से देखा तथा कुछ पुस्तकें भी प्राप्त की थीं। उनका कहना था कि धार्मिक विविधता किसी भी देश की ताकत होती है और इसे राष्ट्रीय एकता के लिए चुनौती नहीं बनने देना चाहिए, साथ ही सांप्रदायिक टकराव से बचना जरूरी है।

सर्वोच्च नेता बनने के बाद कभी भारत नहीं आए

1989 में ईरान के सर्वोच्च नेता बनने के बाद खामेनेई ने भारत का कोई आधिकारिक दौरा नहीं किया। हालांकि, भारत और ईरान के नेताओं के बीच मुलाकातें तेहरान या अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान होती रहीं।

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संबंधों में उतार-चढ़ाव बने रहे

खामेनेई के कार्यकाल में भारत और ईरान के रिश्तों में कई बार तनाव भी देखने को मिला। खासतौर पर कश्मीर से जुड़े कुछ बयानों पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न हिस्सा है और इसमें बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं है। फिर भी, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और ऊर्जा सहयोग पर आधारित संबंध जारी रहे। रणनीतिक साझेदारी और क्षेत्रीय हितों के कारण भारत और ईरान संवाद बनाए रखते आए हैं।

 

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