Edited By Rahul Rana,Updated: 08 Aug, 2026 01:56 PM

भारतीय वायु सेना (IAF) के एक 44 वर्षीय विंग कमांडर पर सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसकर रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के साथ साझा करने का आरोप लगा है।
नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना (IAF) के एक 44 वर्षीय विंग कमांडर पर सोशल मीडिया के जरिए कथित तौर पर हनी ट्रैप में फंसकर रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी और गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तानी इंटेलिजेंस ऑपरेटिव के साथ साझा करने का आरोप लगा है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, अधिकारी को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था और मामले की जांच पूरी होने के बाद 30 जुलाई को संबंधित अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
अधिकारी की पहचान सार्वजनिक नहीं
अधिकारी की पहचान फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। पुलिस के अनुसार, यह मामला IAF अधिकारियों की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया था। आरोपी के खिलाफ Official Secrets Act (OSA) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है।
सोशल मीडिया पर महिला से हुई थी दोस्ती
जांच से जुड़े एक अधिकारी के अनुसार, विंग कमांडर निजी जिंदगी में कथित तौर पर परेशानियों से गुजर रहे थे। इसी दौरान इस साल की शुरुआत में सोशल मीडिया पर एक महिला ने उनसे दोस्ती की। दोनों के बीच मैसेज और फोन पर बातचीत होने लगी। आरोप है कि महिला ने धीरे-धीरे अधिकारी का विश्वास हासिल किया और इसके बाद उनसे भारतीय रक्षा व्यवस्था से जुड़ी संवेदनशील जानकारी तथा गोपनीय दस्तावेज हासिल किए। पुलिस के अनुसार, जानकारी फोटो और वीडियो के जरिए साझा किए जाने का आरोप है।
ऐप इंस्टॉल कराने का भी आरोप
जांच अधिकारियों के मुताबिक, मामले में एक और गंभीर पहलू सामने आया है। आरोप है कि महिला ने अधिकारी से उनके एक सहकर्मी के मोबाइल फोन में एक ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह ऐप स्पाइवेयर या रिमोट एक्सेस मालवेयर हो सकता था, जिसका इस्तेमाल मोबाइल में मौजूद डेटा तक पहुंच बनाने या उसकी लोकेशन ट्रैक करने के लिए किया जा सकता था। इस पहलू की जांच भी की गई है।
IAF की निगरानी में आई गतिविधियां
IAF के प्रवक्ता के मुताबिक, अधिकारी पर कड़ी निगरानी रखी जा रही थी। उनकी संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी सामने आने के बाद उन्हें जांच एजेंसियों को सौंप दिया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों ने संयुक्त रूप से पूछताछ की। जांच के बाद अधिकारी को अदालत में पेश किया गया, जहां जून में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, वह फिलहाल तिहाड़ जेल में हैं।
करीब 50 दिन बाद आई जानकारी
दिल्ली पुलिस ने अधिकारी की गिरफ्तारी 30 मई को किए जाने की बात कही है, लेकिन इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से करीब 50 दिन बाद सामने आई। पुलिस के मुताबिक, जांच पूरी करने के बाद 30 जुलाई को सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी गई। पुलिस ने अपने बयान में कहा कि मामला अभी अदालत के समक्ष विचाराधीन है। ऐसे में आरोपी पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगी।
पाकिस्तानी इंटेलिजेंस कनेक्शन
जांच में सबसे अहम सवाल यह है कि कथित तौर पर हासिल की गई संवेदनशील जानकारी का इस्तेमाल किस तरह किया जाना था और इस पूरे मामले के पीछे कोई बड़ा नेटवर्क था या नहीं। सहकर्मी के मोबाइल में संदिग्ध ऐप इंस्टॉल कराने के आरोप ने भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। यह मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि इसमें एक कार्यरत वायुसेना अधिकारी, संवेदनशील रक्षा जानकारी और कथित पाकिस्तानी इंटेलिजेंस कनेक्शन सामने आया है। हालांकि, जांच एजेंसियों के आरोपों और अदालत में साबित तथ्यों के बीच अंतर को देखते हुए मामले में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।