Edited By Radhika,Updated: 09 Feb, 2026 04:06 PM

संसद के बजट सत्र में सोमवार को उस समय भारी हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सदन से बाहर आकर गंभीर आरोप लगाए। थरूर का दावा है कि लोकसभा में न केवल उन्हें बोलने से रोका गया, बल्कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनका...
नेशनल डेस्क: संसद के बजट सत्र में सोमवार को उस समय भारी हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला, जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सदन से बाहर आकर गंभीर आरोप लगाए। थरूर का दावा है कि लोकसभा में न केवल उन्हें बोलने से रोका गया, बल्कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी और उनका माइक भी काट दिया गया।
शशि थरूर का बड़ा आरोप
सदन की कार्यवाही 10 फरवरी तक स्थगित होने के बाद मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा कि उन्होंने अपनी 70 साल की संसदीय परंपरा में ऐसा 'अजीब' व्यवहार नहीं देखा। थरूर के अनुसार, जब वह बजट पर बोलने के लिए खड़े हुए, तो उन्होंने अपनी बारी राहुल गांधी (LoP) को देने की पेशकश की। थरूर ने आरोप लगाया कि जैसे ही राहुल गांधी ने बोलना शुरू किया, पीठासीन अधिकारी ने दोनों का माइक बंद कर दिया।
थरूर ने कहा, "सदन में एक परंपरा रही है कि जब नेता प्रतिपक्ष और संसदीय कार्य मंत्री हाथ उठाते हैं, तो उन्हें बोलने का मौका दिया जाता है। लेकिन यहाँ पीठासीन अधिकारी केवल मंत्री को बोलने दे रहे हैं और राहुल गांधी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।"
संसद में घमासान की असली वजह?
विपक्ष लगातार India-US Interim Trade Framework और पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इन संवेदनशील मुद्दों पर बहस से भाग रही है, जबकि सरकार का कहना है कि विपक्ष बजट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा में बाधा डाल रहा है।

शशि थरूर की दो टूक: "जब आप विपक्ष के नेता को बोलने ही नहीं देते, तो आप असल में संसद के बुनियादी मकसद को ही खत्म कर रहे हैं।"