शशि थरूर ने सरकार पर कसा तंज- 'जब मैगजीन में सब छप चुका, तो राहुल को क्यों रोका?'

Edited By Updated: 02 Feb, 2026 06:00 PM

shashi tharoor defends rahul gandhi s speech on china issue

संसद के बजट सत्र के दौरान डोकलाम और चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर मचे घमासान के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। थरूर ने कहा कि राहुल गांधी जो मुद्दा उठा रहे थे, वह पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, ऐसे में सरकार...

नेशनल डेस्क: संसद के बजट सत्र के दौरान डोकलाम और चीनी घुसपैठ के मुद्दे पर मचे घमासान के बीच कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सरकार के रवैये पर कड़ा प्रहार किया है। थरूर ने कहा कि राहुल गांधी जो मुद्दा उठा रहे थे, वह पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, ऐसे में सरकार का शोर-शराबा बेवजह था।

जो मैगजीन में छप चुका, उस पर आपत्ति क्यों?

शशि थरूर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि राहुल गांधी 'कारवां' मैगजीन में छपे एक लेख का हवाला दे रहे थे। इस लेख में जनरल नरवणे के उन संस्मरणों का जिक्र है जो अभी प्रकाशित नहीं हुए हैं। थरूर ने तर्क दिया, "मैगजीन सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है और कोई भी उसे पढ़ सकता है। सरकार को इस बात पर हंगामा करने के बजाय कि किताब छपी है या नहीं, राहुल जी को अपनी बात पूरी करने देनी चाहिए थी।"

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नेहरू के दौर का दिया उदाहरण

सरकार को लोकतांत्रिक मूल्यों की याद दिलाते हुए थरूर ने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के समय का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "1962 के चीन युद्ध के दौरान भी संसद में हर दिन बहस होती थी। तब सांसदों पर कोई व्हिप नहीं था और सरकारी सांसद भी खुलकर आलोचना कर पाते थे। 1965 और 1971 के युद्धों में भी देश को भरोसे में लिया गया था, लेकिन आज की सरकार चर्चा से डरती क्यों है?"

तथ्य गलत हैं तो सुधारें, चुप न कराएं

थरूर ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी का मकसद सेना पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना था। उन्होंने कहा, "अगर सरकार को लगता है कि तथ्य गलत हैं, तो सही तरीका तथ्यों को सुधारना है, न कि सामने वाले को बोलने से रोकना। यह हमारे लोकतंत्र और संसद की गरिमा के लिए अच्छा नहीं है।"

 

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