Today Petrol-Diesel Price Hike: अब इस कंपनी ने मचाया हाहाकार, बढ़ाए Petrol-Diesel के दाम, जानें कितना हुआ महंगा?

Edited By Updated: 05 Apr, 2026 12:08 PM

shell india made a big increase in the prices of petrol and diesel

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर अब भारतीय बाजार में दिखने लगा है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता के लिए रेट स्थिर रखे हैं लेकिन निजी (Private) तेल कंपनियों ने...

Today Petrol Diesel Price : ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर अब भारतीय बाजार में दिखने लगा है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता के लिए रेट स्थिर रखे हैं लेकिन निजी (Private) तेल कंपनियों ने अपने घाटे को कम करने के लिए कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। Shell India ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा इजाफा कर सबको चौंका दिया है।

निजी कंपनियों का बड़ा फैसला: ₹25 तक का उछाल

निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Shell India ने 1 अप्रैल से अपने फ्यूल रेट्स में भारी बदलाव किया है:

डीजल: कीमतों में 25 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है।

पेट्रोल: इसके दाम 7.41 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं।

असर: इस बढ़ोतरी के बाद निजी आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें 119 से 123 रुपये के करीब पहुंच गई हैं। Nayara Energy के बाद अब शेल के इस कदम से निजी पंपों पर तेल भरवाना महंगा हो गया है।

सरकारी कंपनियों ने दी राहत: बड़े शहरों के रेट्स

इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रमुख शहरों में आज के रेट इस प्रकार हैं:

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Premium Fuel भी हुआ महंगा

सिर्फ निजी कंपनियां ही नहीं सरकारी कंपनियों के प्रीमियम वैरिएंट्स की कीमतों में भी उछाल आया है:

XP100 (Indian Oil): इसकी कीमत में 11 रुपये का इजाफा हुआ है जिससे यह ₹149 से बढ़कर ₹160 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।

एक्स्ट्रा ग्रीन (डीजल): इसकी कीमत ₹91.49 से बढ़कर ₹92.99 हो गई है।

क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?

रूस-यूक्रेन या अन्य वैश्विक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी कंपनियां घाटा सहकर भी कीमतें स्थिर रखे हुए हैं लेकिन निजी कंपनियों के पास सब्सिडी का सहारा न होने के कारण वे सीधे ग्राहकों पर बोझ डाल रही हैं।

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