दरिंदा बाप! कलयुगी पिता ने अपनी ही बेटी को बनाया हवस का शिकार, नाबालिग ने अपनी ही बहन को दिया जन्म

Edited By Updated: 15 Feb, 2026 01:18 PM

sonebhadra 15 year old daughter gives birth to her own sister

उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता की हैवानियत के कारण उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी को एक बच्ची को जन्म देना पड़ा जो रिश्ते में उसकी बेटी भी...

नेशनल डेस्क। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक पिता की हैवानियत के कारण उसकी 15 वर्षीय नाबालिग बेटी को एक बच्ची को जन्म देना पड़ा जो रिश्ते में उसकी बेटी भी है और जैविक रूप से उसकी बहन भी। इस जघन्य अपराध पर कड़ा रुख अपनाते हुए पॉक्सो (POCSO) कोर्ट ने दोषी पिता को मरते दम तक जेल में रहने यानी उम्रकैद की सजा सुनाई है।

घर के भीतर ही छिपी थी हैवानियत

यह मामला तब प्रकाश में आया जब पीड़िता के चाचा ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में पता चला कि 35 वर्षीय आरोपी पिता अपनी ही नाबालिग बेटी के साथ लंबे समय से बलात्कार कर रहा था। हैवानियत का सिलसिला तब तक चलता रहा जब तक कि किशोरी सात महीने की गर्भवती नहीं हो गई। जब यह खौफनाक सच सामने आया तो पूरे इलाके में सन्नाटा पसर गया।

अदालत का फैसला: समाज के लिए कैंसर है ऐसे अपराधी

POCSO स्पेशल कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए न केवल आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई बल्कि उस पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट संदेश दिया कि जो पिता रक्षक होने के बजाय भक्षक बन जाए वह किसी भी दया का पात्र नहीं है। कोर्ट ने इस सजा के जरिए समाज को यह चेतावनी दी है कि बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों में कानून की ढाल अब और भी मजबूत हो गई है।

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क्या POCSO एक्ट बच्चों की सुरक्षा कर पा रहा है?

इस मामले ने एक बार फिर साबित किया है कि पॉक्सो एक्ट (2012) बच्चों के लिए सबसे बड़ा कानूनी हथियार है। इसमें त्वरित सुनवाई (Fast Track Trial), पीड़िता की पहचान गुप्त रखने और मानसिक सहायता देने का कड़ा प्रावधान है। सोनभद्र के इस केस में भी कोर्ट की सक्रियता ने न्याय की उम्मीद जगाई है।

यूपी में बढ़ते मामले: खतरा बाहर नहीं, भीतर है

सोनभद्र की इस घटना के समानांतर ही यूपी से एक और मामला सामने आया जहां एक 17 वर्षीय किशोरी के साथ उसके सगे फूफा ने दरिंदगी की और उसे गर्भवती कर दिया। ये घटनाएं समाज के उस कड़वे सच को उजागर करती हैं कि अक्सर बच्चों के लिए खतरा बाहर के अनजान लोगों से नहीं बल्कि घर के भीतर रहने वाले उन रिश्तेदारों से होता है जिन पर वे सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं।

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पीड़िता को सरकारी मदद

सरकारी नियमों के अनुसार ऐसी सर्वाइवर्स को मेडिकल उपचार के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग और कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। इस मामले में भी किशोरी और नवजात की सुरक्षा व देखभाल की जिम्मेदारी प्रशासन द्वारा सुनिश्चित की गई है।

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