Edited By SHUKDEV PRASAD,Updated: 17 Mar, 2026 05:57 PM

देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने गोद लेने वाली महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश देना अनिवार्य होगा।
नेशनल डेस्क: देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने गोद लेने वाली महिलाओं के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। अब किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने पर महिला को 12 हफ्ते का मातृत्व अवकाश देना अनिवार्य होगा। पहले यह सुविधा केवल उन मामलों तक सीमित थी, जहां गोद लिया गया बच्चा तीन महीने से कम उम्र का हो। अदालत ने इस शर्त को अब असंवैधानिक बताते हुए समाप्त कर दिया है।
कानून की धारा रद्द, समानता पर जोर
कोर्ट ने Code on Social Security 2020 की धारा 60(4) को निरस्त करते हुए कहा कि यह प्रावधान Article 14 of Indian Constitution और Article 21 of Indian Constitution के खिलाफ है। अदालत का कहना है कि जैविक और गोद लेने वाली माताओं के बीच किसी भी तरह का अंतर करना उचित नहीं है। मातृत्व लाभ का उद्देश्य मां और बच्चे के बीच देखभाल और भावनात्मक जुड़ाव को मजबूत करना है।
गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा
अदालत ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि माता-पिता बनने का अधिकार केवल जैविक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी इस अधिकार का हिस्सा है, जिससे पारिवारिक संरचना की समझ और अधिक व्यापक हो जाती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़े बच्चों को नए माहौल में ढलने में अधिक समय लगता है, इसलिए मां को पर्याप्त अवकाश मिलना बेहद जरूरी है।
पितृत्व अवकाश पर भी अहम टिप्पणी
Supreme Court of India ने केंद्र सरकार को पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) पर भी नीति बनाने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि बच्चों की देखभाल को केवल मां की जिम्मेदारी मानना सही नहीं है, बल्कि इसे जेंडर-न्यूट्रल और समावेशी बनाना चाहिए।
याचिका के आधार पर आया फैसला
यह फैसला कर्नाटक की वकील Hamsanandini Nanduri द्वारा दायर याचिका पर सुनाया गया, जिसकी पैरवी अधिवक्ता Bani Dixit ने की। याचिका में बताया गया था कि भारत में अधिकतर गोद लिए जाने वाले बच्चे तीन महीने से बड़े होते हैं, ऐसे में पुरानी व्यवस्था न केवल अव्यवहारिक थी, बल्कि इससे महिलाओं के साथ असमानता भी पैदा होती थी।
क्यों अहम है यह फैसला?
- गोद लेने वाली माताओं को मिला समान अधिकार
- बच्चों के बेहतर पालन-पोषण को मिलेगा समय
- कानून में मौजूद भेदभाव खत्म
- जेंडर-न्यूट्रल पैरेंटिंग को बढ़ावा